भारत में 2030 तक डाटा सेंटर की क्षमता 3 गुना होने का अनुमान
भारत के डाटा सेंटर में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। उम्मीद है कि 2030 तक इनकी क्षमता 3 गुना से भी ज्यादा बढ़ जाएगी।
इसके पीछे 25 अरब डॉलर (करीब 2,400 अरब रुपये) का भारी निवेश किया जा रहा है। यह निवेश मुख्य तौर पर बिजली, इलेक्ट्रिकल उपकरण और कूलिंग सिस्टम में किया जाएगा।
ये वो बुनियादी चीजें हैं, जो क्लाउड स्टोरेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आज की बड़ी तकनीकों के लिए बेहद जरूरी हैं और जिनकी हर तरफ चर्चा हो रही है।
मैराथन ट्रेंड्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अतुल सूरी का कहना है कि इस खर्च का करीब 75 फीसदी हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों में इस्तेमाल होगा।
उपकरण बनाने वाली कंपनियों में निवेश की सलाह
बिजली के सामान और इलेक्ट्रिकल सेक्टर में पहले से ही 41 फीसदी की बढ़त देखी जा चुकी है, वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) में भी 54 फीसदी का उछाल आया है। इसकी एक बड़ी वजह सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी योजनाएं हैं।
सूरी का सुझाव है कि जो निवेशक समझदारी से पैसा लगाना चाहते हैं, उन्हें कॉन्ट्रैक्टर्स के बजाय उपकरण बनाने वाली कंपनियों में निवेश करना चाहिए, ताकि उन्हें बेहतर रिटर्न मिले।
एक तरफ, AI लगातार पारंपरिक IT नौकरियों को ऑटोमेट कर रहा है, जिससे उनमें बदलाव आ रहा है, वहीं अब असली जोर भारत के डिजिटल भविष्य के लिए जरूरी फिजिकल टेक्नोलॉजी बनाने पर है, जो पारंपरिक IT सेवाओं से काफी अलग है।