भारत में करीब 15,000 अरब रुपये तक पहुंच सकता है ऊर्जा में निवेश
भारत ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश की तैयारी कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि 2026 तक यह निवेश 170 अरब डॉलर (करीब 15,000 अरब रुपये) तक पहुंच जाएगा।
इसमें सौर ऊर्जा और तेल शोधन की भूमिका सबसे अहम रही है, जिनकी सालाना बढ़ोतरी क्रमशः 25 फीसदी और 23 फीसदी रही है। पिछले 5 सालों में ऊर्जा क्षेत्र में हुए कुल निवेश में एक चौथाई योगदान इन्हीं दोनों का रहा है।
गैर-जीवाश्म ईंधन से 50 फीसदी बिजली क्षमता का हासिल किया लक्ष्य
भारत ने गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 50 फीसदी बिजली उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित समय से 5 साल पहले ही पार कर लिया है। अब देश की कुल स्थापित क्षमता का 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों से आता है। इसी वजह से अब इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर अपग्रेड करने की जरूरत पड़ रही है।
अनुमान है कि 2026 तक बिजली के ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन में 26 अरब डॉलर (करीब 2,400 अरब रुपये) का निवेश किया जाएगा। साथ ही, एनर्जी स्टोरेज का विस्तार भी लगातार जारी रहेगा।
इन सभी प्रयासों से भारत 2030 तक 500 गीगावाट की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।