साल के अंत तक कंपनियां कर पाएंगी कार्बन क्रेडिट की खरीद-फरोख्त
भारतीय कंपनियां अब कार्बन क्रेडिट की खरीद-फरोख्त कर पाएंगी। यह मौका उन्हें नई कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) के तहत मिलेगा, जिसे 2026 के आखिर तक लॉन्च किया जाएगा।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत को 2070 तक अपने नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करना है। मिंट के सस्टेनेबिलिटी इम्पैक्ट समिट में विशेषज्ञों ने इस बात पर खास जोर दिया कि क्रेडिट की कीमतें न्यायसंगत हों और उनकी सही तरीके से जांच हो, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
8 क्षेत्रों की कंपनियों को समर्थन देंगे कार्बन क्रेडिट
कार्बन क्रेडिट सिर्फ कंपनियों को अपने उत्सर्जन कम करने में सहयोग करने के लिए हैं, ये असली कार्रवाई का विकल्प नहीं हैं।
इस बाजार में स्टील और सीमेंट जैसे 8 मुख्य औद्योगिक क्षेत्र शामिल किए गए हैं। ये सभी मिलकर देश की कुल ग्रीनहाउस गैसों का 5वां हिस्सा उत्सर्जित करते हैं। जो कंपनी अपने उत्सर्जन के तय लक्ष्यों से कम गैसें निकालती है, उसे कार्बन क्रेडिट मिलते हैं, वहीं जो लक्ष्य पूरा नहीं कर पाती, उसे ये क्रेडिट खरीदने पड़ते हैं।
कृषि क्षेत्र में बना सकते हैं कार्बन क्रेडिट
कृषि क्षेत्र में भी कार्बन क्रेडिट बनाने की अपार संभावनाएं हैं। खेती के तरीकों में बदलाव लाकर इन क्रेडिट को आसानी से तैयार किया जा सकता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ब्लॉकचेन जैसी आधुनिक तकनीकें इन क्रेडिट्स की सही जांच करने में काफी सहायक हो सकती हैं।
हालांकि, अभी भी इन क्रेडिट्स के नियमों और कीमतों को लेकर कई सवाल हैं। जब तक इनके जवाब नहीं मिलते, तब तक इस बाजार का पूरी तरह से शुरू हो पाना मुश्किल होगा।