सरकार निजी कंपनियों के लिए खोल रही परमाणु ऊर्जा का क्षेत्र
सरकार परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोल रही है। इसका मकसद ग्रीन एनर्जी की आपूर्ति बढ़ाना और देश के हरित बदलाव को तेज करना है।
सरकार सुनिश्चित बिजली खरीद समझौतों (एश्योर्ड पावर परचेज एग्रीमेंट्स) और 1 लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना के जरिए वित्तीय सहायता देने पर विचार कर रही है।
यह RDI योजना परमाणु ऊर्जा जैसी परिवर्तनकारी तकनीकों के लिए लंबी अवधि का, कम ब्याज वाला और असुरक्षित कर्ज उपलब्ध कराती है।
नीति आयोग के सदस्य अभय करंदीकर का कहना है कि क्षमता बढ़ाने के लिए एक ठोस रोडमैप बनाने को हितधारकों के साथ बातचीत जल्द शुरू होगी।
अधिनियम देगा सीमित निजी भागीदारी की अनुमति
आगामी परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और विकास (SHANTI) अधिनियम (2025) निजी कंपनियों को प्लांट चलाने और उपकरण बनाने जैसे कामों में शामिल होने की अनुमति देगा।
हालांकि, ईंधन चक्र के कुछ संवेदनशील काम निजी क्षेत्र के दायरे से बाहर रहेंगे। साथ ही, एक तय सीमा तक यूरेनियम-235 के संवर्धन की अनुमति दी जाएगी।
अगर, सब कुछ सही रहा तो भारत की परमाणु क्षमता 2031-32 तक 8.78 गीगावाट (GW) से बढ़कर 22.38GW हो सकती है और 2047 तक 100GW तक पहुंच सकती है।
न्यूक्लियर एनर्जी मिशन के तहत स्थापित होंगे 5 रिएक्टर
20,000 करोड़ रुपये के न्यूक्लियर एनर्जी मिशन के तहत भारत 2033 तक 5 घरेलू स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) शुरू करने की योजना बना रहा है।
इन कदमों से न केवल निवेश आकर्षित होगा, बल्कि 2070 तक देश के बड़े डिकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।