चिली सीधे भारत को तांबा-लिथियम देने को नहीं तैयार, CEPA वार्ता में अड़चन
भारत एक नए व्यापार समझौते (CEPA) के तहत चिली से तांबे और लिथियम जैसे जरूरी खनिजों तक आसानी से पहुंच चाहता है। उसकी उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक इस पर कोई फैसला हो जाए।
हालांकि, ये महत्वपूर्ण खनिज अभी भी चल रही बातचीत में एक बड़ी अडचन बने हुए हैं। चिली इन खनिजों पर बातचीत करने को तो तैयार है, लेकिन वह भारत को सीधे पहुंच देने के लिए अभी राजी नहीं है। इसके बजाय, उसका ध्यान एक मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने पर ज्यादा है।
चिली ने खनिज संबंधी अनुरोधों को ठुकराया
चिली के पास लिथियम के बड़े भंडार और तांबे का अच्छा उत्पादन है, जो भारत की टेक और ग्रीन एनर्जी की योजनाओं के लिए बहुत अहम हैं, लेकिन कुछ कानूनी अडचनों के चलते चिली ने भारत के कुछ अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया है।
फिर भी दोनों देश साथ मिलकर काम करने के तरीके ढूंढ रहे हैं। इसका एक उदाहरण 2025 में चिली की कोडेल्को और अडाणी एंटरप्राइजेज की सहायक कंपनी कच्छ कॉपर के बीच तांबे के प्रोजेक्ट्स को लेकर हुई साझेदारी है। वे अपने व्यापार समझौते को केवल वस्तुओं से आगे बढाकर और भी कई क्षेत्रों में बढ़ाना चाहते हैं।