भारत को रूस से कच्चा तेल खरीद पड़ रहा महंगा
अप्रैल में भारत ने अपनी कुल कच्चा तेल खरीद का लगभग 38 फीसदी हिस्सा रूस से खरीदा, जो पिछले लगभग एक साल में सबसे ज्यादा है। यह बढ़ोतरी पश्चिमी एशिया में चल रहे संकट की वजह से हुई, जिसने तेल के दाम बढ़ा दिए।
नतीजा यह हुआ कि भारत को रूसी तेल के लिए प्रति टन 77.8 डॉलर (करीब 7,200 रुपये) का भारी प्रीमियम चुकाना पड़ा, जो पहले मिलने वाले डिस्काउंट से 425 फीसदी ज्यादा था।
इस वजह से तेल बिल बढ़कर 15.4 अरब डॉलर (करीब 1,400 अरब रुपये) हो गया। इस बढ़ोतरी के पीछे सिर्फ ज्यादा दाम ही नहीं, बल्कि ज्यादा मात्रा में तेल का आयात भी एक वजह रहा।
तेल आयात में उछाल
मार्च के मुकाबले भारत का कुल तेल आयात 23 फीसदी बढ़कर 1.95 करोड़ टन हो गया। इस कुल मात्रा में रूसी कच्चा तेल करीब एक तिहाई यानि 67 लाख टन था, जो पिछले महीने के मुकाबले एक बड़ी बढ़त है।
इस दौरान अमेरिका से आने वाला तेल पिछले 8 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। यह साफ दिखाता है कि भारत अब रूसी तेल की आपूर्ति पर और ज्यादा निर्भर हो रहा है।