सोलर प्रोजेक्ट्स में 1 जून से भारत में बना सेल इस्तेमाल करना अनिवार्य
1 जून से घर, दुकान या कारखाने जैसे सभी सोलर प्रोजेक्ट में सिर्फ भारत में बने सोलर सेल का ही इस्तेमाल करना होगा। इसमें खास तौर पर वे नेट मीटरिंग और ओपन एक्सेस प्रोजेक्ट भी शामिल हैं, जो इस तारीख के बाद लगाए जाएंगे।
सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से विदेशी सोलर सेल का आयात कम होगा और देश के निर्माताओं को बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, उन प्रोजेक्ट्स को कुछ छूट मिलेगी, जो पहले ही काफी काम कर चुके हैं, जैसे कि जिन्होंने सोलर मॉड्यूल लगा दिए हैं या जमीन खरीद ली है।
भारत में बने सोलर मॉड्यूल की कीमत ज्यादा
फिलहाल, भारत हर साल 200 गीगावाट के सोलर पैनल बना लेता है। यह एक बड़ी क्षमता है, लेकिन, दिक्कत यह है कि इसमें लगने वाले ज्यादातर सोलर सेल बाहर से मंगाए जाते हैं, क्योंकि देश में सिर्फ 30 गीगावाट सेल बनाने की ही क्षमता है।
इसका सीधा असर छोटे कारोबारों पर पड़ रहा है। दरअसल, भारत में बने सोलर मॉड्यूल की कीमत विदेशी मॉड्यूल के मुकाबले 120 फीसदी तक ज्यादा हो सकती है।
ऐसे में सिर्फ बड़ी और एकीकृत कंपनियां ही इस नियम से फायदा उठा पाएंगी, जिनके पास अपने खुद के सेल बनाने की सुविधा है। उद्योग जगत के बड़े जानकार चेतावनी दे रहे हैं कि अगर, देश में सेल का उत्पादन तेजी से नहीं बढ़ाया गया, तो बाजार से छोटे खिलाड़ी बाहर हो सकते हैं। बढ़ती लागत और कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते उनके लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा।