खनन क्षेत्र में नए कानून से कंपनियों पर घटा 1.5 लाख करोड़ रुपये के टैक्स का बोझ
भारत ने खदान और खनिज (विकास) अधिनियम, 2026 लागू कर दिया है। इस कानून का मुख्य मकसद सभी राज्यों में खनन पर लगने वाले करों को एक समान बनाना है।
इस अधिनियम ने 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पैदा हुई उलझन को दूर किया है। उस फैसले के कारण राज्यों को अतिरिक्त शुल्क लगाने की छूट मिली हुई थी, जिससे खनन कंपनियों को अपने खर्चों का अंदाजा लगाने में काफी मुश्किल हो रही थी।
कंपनियों को देने पड़ते थे 14 तरह टैक्स-शुल्क
इस बदलाव से पहले खनन कंपनियों को करीब 14 तरह के करों, शुल्कों और फीसों से जूझना पड़ता था, जिनका कुल बोझ कभी-कभी 20 फीसदी तक पहुंच जाता था।
अब स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया का कहना है कि अधिक स्पष्टता और एकरूपता आने से कंपनियां बेहतर तरीके से अपनी योजनाएं बना सकती हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को खास तौर पर राहत मिली है। सुधार से पहले उन पर 1.5 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ दिख रहा था, जिसे इस नए नियम ने काफी हद तक कम कर दिया है।