भारत ने तीन साल के प्रतिबंध के बाद गेहूं उत्पाद के कुछ निर्यात की अनुमति दी
क्या है खबर?
भारत ने कुछ गेहूं से बनी चीजों के निर्यात को मंजूरी दे दी है। इससे तीन साल से ज्यादा समय से लगे प्रतिबंधों में आंशिक ढील मिली है। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि इस साल गेहूं की फसल अच्छी रहेगी, जिससे देश में सप्लाई मजबूत होगी और भंडार भी पर्याप्त रहेगा। हालांकि, गेहूं के सीधे निर्यात पर रोक अब भी जारी है, लेकिन इससे जुड़े कुछ प्रोसेस्ड उत्पादों को बाहर भेजने की अनुमति दी गई है।
कोटा
आटा और सूजी के लिए तय किया गया कोटा
विदेश व्यापार महानिदेशालय की 16 जनवरी की अधिसूचना के अनुसार, भारत 5 लाख टन गेहूं आधारित उत्पादों का निर्यात करेगा। इसमें गेहूं का आटा, सूजी और अन्य जुड़े प्रोडक्ट शामिल हैं। यह मंजूरी फिलहाल एक बार के कोटे के तौर पर दी गई है। सरकार ने साफ किया है कि कच्चे गेहूं के निर्यात पर जो रोक लगी है, वह अभी हटाई नहीं गई है और आगे भी लागू रहेगी। इससे घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता मिलेगी।
फैसला
अमेरिका से बातचीत के बीच लिया गया फैसला
भारत ने मई, 2022 में गेहूं के कई निर्यात रोक दिए थे। अब कुछ उत्पादों को दोबारा बाहर भेजने का फैसला ऐसे समय पर आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार बातचीत चल रही है। अमेरिका भारत पर कृषि बाजार खोलने का दबाव बना रहा है और ज्यादा पहुंच की मांग कर रहा है। इससे पहले खबरें आई थीं कि भारत गेहूं से जुड़े उत्पादों के निर्यात पर दोबारा विचार कर रहा है।
राहत
वैश्विक बाजार और आयातक देशों को राहत
भारत के इस कदम से वैश्विक गेहूं सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद है। खासकर एशिया, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के वे देश, जो गेहूं आयात पर काफी हद तक निर्भर हैं, उन्हें फायदा मिल सकता है। बाजार में सप्लाई बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इससे महंगाई से जूझ रहे देशों को कुछ राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसका लाभ खाद्य उत्पादों के दामों में देखने को मिलेगा।