विदेशी निवेश की निकासी धीमी हुई, मई में करीब 6,500 करोड़ रुपये निकाले
पिछले कई महीनों से भारतीय बाजारों से पैसा तेजी से बाहर निकल रहा था, लेकिन अब इस रफ्तार में कुछ कमी आई है। दरअसल, दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कमोडिटीज से भरपूर अर्थव्यवस्थाओं की तरफ निवेशकों का रुझान बढ़ा है, जिसके चलते अप्रैल, 2025 से भारत से पैसा निकलकर दूसरे एशियाई बाजारों में जा रहा था।
अब इस पैसे के निकलने की रफ्तार धीमी पड़ गई है। विदेशी निवेशकों ने मई 2026 में सिर्फ 70.2 करोड़ डॉलर (करीब 6,500 करोड़ रुपये) निकाले, जो अप्रैल के 1.5 अरब डॉलर (करीब 130 अरब रुपये) और मार्च के 3.5 अरब डॉलर (करीब 320 अरब रुपये) के मुकाबले काफी कम है।
चीन-केंद्रित फंडों से अप्रैल से 79 बिलियन डॉलर निकले
भारतीय बाजारों से 11 हफ्तों में करीब 6 अरब डॉलर (550 अरब रुपये) निकलने के बाद अब हालात कुछ बेहतर हुए हैं। हालांकि, कुछ पुराने निवेशक अभी भी बिकवाली कर रहे हैं।
भारत ही नहीं, बल्कि दूसरे उभरते हुए बाजारों में भी पैसा निकलने का यह सिलसिला जारी है। लगातार 6 हफ्तों से ऐसा हो रहा है। चीन पर केंद्रित फंडों को इससे सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है, जिन्हें अप्रैल से अब तक 79 अरब डॉलर (7,300 अरब रुपये) का घाटा हुआ है।
हाल ही में दक्षिण कोरिया और ब्राजील जैसे देशों से भी भारी मात्रा में पैसा बाहर गया है। भले ही पैसिव ETF ने इस झटके को कुछ कम किया हो, लेकिन फाइनेंशियल और ब्रोकरेज फर्म एलारा का कहना है कि निवेशकों का रुख अभी भी सतर्कता वाला है।
इसकी वजह यह है कि AI और कमोडिटीज को लेकर, जो दुनियाभर में उत्साह था, वो अब ठंडा पड़ता दिख रहा है।