IEA ने मध्य पूर्व तनाव को ऊर्जा क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा संकट बताया
मध्य पूर्व में जारी जंग ने दुनिया के सामने ऊर्जा सुरक्षा का ऐसा संकट पैदा कर दिया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) अब तक का सबसे बड़ा संकट बता रही है।
तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने की वजह से दुनिया के देश नए व्यापारिक रास्ते ढूंढ रहे हैं और अपनी स्थानीय उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में लगे हुए हैं।
IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल के अनुसार, यह बदलाव वैश्विक निवेश रणनीतियों को नया रूप देगा, जो 1970 के दशक के तेल संकट के बाद ऊर्जा जगत में आए बड़े बदलावों जैसा ही होगा।
वैश्विक ऊर्जा निवेश 3,400 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद
वैश्विक ऊर्जा निवेश 2026 के अंत तक 3,400 अरब डॉलर (करीब 3.15 लाख अरब रुपये) तक पहुंचने की उम्मीद है। इसमें से करीब 2,200 अरब डॉलर (करीब 2 लाख अरब रुपये) बिजली ग्रिड, ऊर्जा भंडारण, कम उत्सर्जन वाले ईंधन, रिन्यूएबल एनर्जी, न्यूक्लियर पावर, विद्युतीकरण और दक्षता उपायों में लगाया जाएगा।
तेल में निवेश अनिश्चितता और देरी की वजह से 500 अरब डॉलर (करीब 46,500 अरब रुपये) से नीचे गिरता जा रहा है, जबकि अमेरिका और कतर के बड़े प्रोजेक्ट्स की वजह से प्राकृतिक गैस पर होने वाला खर्च बढ़ रहा है।
इसके अलावा, बिजली ग्रिड और बैटरी स्टोरेज में 650 अरब डॉलर (करीब 60, 400 अरब रुपये) से ज्यादा का निवेश होगा, क्योंकि देश भविष्य की बाधाओं से खुद को सुरक्षित रखना चाहते हैं।