IDFC फर्स्ट बैंक ने धोखाधड़ी मामले के निपटारे के लिए किया 645 करोड़ रुपये का भुगतान
क्या है खबर?
IDFC फर्स्ट बैंक ने हरियाणा सरकार से संबंधित संस्थाओं के खातों में धोखाधड़ी से जुड़े दावों के निपटारे के लिए 645 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। उसने शुरुआत में 590 करोड़ रुपये के हेरफेर का अनुमान लगाया है, लेकिन इससे 55 करोड़ रुपये अधिक का भुगतान किया है। बैंक ने कहा, "हम पुष्टि करना चाहते हैं कि ये दावे उसी घटना से संबंधित हैं और उसी शाखा से जुड़े हैं। कोई अन्य दावा लंबित नहीं है।"
असर
जमा राशि पर नहीं पड़ा असर
बैंक ने कहा, "हम यह भी बताना चाहेंगे कि बैंक की कुल जमा राशि स्थिर बनी हुई है और 28 फरवरी, 2026 तक यह 2,920 अरब रुपये थी, जबकि 31 दिसंबर, 2025 तक यह 2,910 अरब रुपये थी।" आगे कहा कि वह अपराधियों के खिलाफ बकाया राशि की वसूली के लिए कार्रवाई जारी रखेगा। ऋणदाता ने कहा कि कोई अन्य लंबित दावा नहीं है और 25 फरवरी के बाद से देशभर में कोई अन्य दावा प्राप्त नहीं हुआ है।
मामला
क्या है मामला?
पिछले महीने बैंक ने हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में अपने कुछ कर्मचारियों और अन्य लोगों से जुड़े लगभग 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की सूचना दी थी। बैंक ने बैंकिंग नियामक को सूचित किया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। यह मामला चंडीगढ़ शाखा में संचालित सरकारी खातों से संबंधित था। राज्य सरकार के एक विभाग ने अपने खाते बंद करने और शेष राशि दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने के अनुरोध के दौरान हेरफेर का पता चला।