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रेपो रेट में बदलाव से आपकी EMI, बचत और निवेश पर क्या पड़ता है असर?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बनाए रखने का फैसला किया है

रेपो रेट में बदलाव से आपकी EMI, बचत और निवेश पर क्या पड़ता है असर?

Jun 05, 2026
11:54 am

क्या है खबर?

वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बनाए रखने का फैसला किया है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद RBI गवर्नर ने कहा कि देश और दुनिया की आर्थिक परिस्थितियों का आकलन करने के बाद यह निर्णय लिया गया। RBI के इस कदम पर बैंकों, निवेशकों और कर्ज लेने वाले लोगों की खास नजर बनी हुई है।

EMI

रेपो रेट घटने पर EMI होती है कम

अगर RBI भविष्य में रेपो रेट में कटौती करता है, तो बैंकों के लिए पैसा जुटाना सस्ता हो जाता है। इसका फायदा ग्राहकों को कम ब्याज दर के रूप में मिल सकता है। ऐसे में होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI घट सकती है। उदाहरण के तौर पर, 20 साल के 50 लाख रुपये के होम लोन पर ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की कमी आने से हर महीने सैकड़ों रुपये की बचत हो सकती है।

FD

FD और बचत पर पड़ सकता है असर

रेपो रेट कम होने पर बैंक अक्सर फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरें भी घटा देते हैं। इसका मतलब है कि नई FD कराने वाले लोगों को पहले की तुलना में कम रिटर्न मिल सकता है। वहीं रेपो रेट बढ़ने पर बैंक FD पर ज्यादा ब्याज दे सकते हैं। इसलिए FD निवेशकों के लिए आमतौर पर रेपो रेट में बढ़ोतरी फायदेमंद मानी जाती है, जबकि कटौती की स्थिति में रिटर्न थोड़ा कम हो सकता है।

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म्यूचुअल फंड

शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड पर प्रभाव

रेपो रेट में कटौती होने पर कंपनियों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है। इससे कारोबार बढ़ने और मुनाफा बेहतर होने की उम्मीद रहती है। यही वजह है कि शेयर बाजार और इक्विटी म्यूचुअल फंड को अक्सर इसका फायदा मिलता है। वहीं डेट म्यूचुअल फंड भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, क्योंकि पुराने ज्यादा ब्याज वाले बॉन्ड की कीमत बढ़ जाती है। इससे निवेशकों को अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना रहती है।

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बदलाव

रेपो रेट बढ़ने पर क्या बदलता है?

अगर RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों के कर्ज महंगे हो जाते हैं और इसका असर ग्राहकों की EMI पर पड़ता है। होम लोन और अन्य कर्जों की मासिक किस्त बढ़ सकती है। दूसरी ओर, FD पर मिलने वाला ब्याज बढ़ने की संभावना रहती है। शेयर बाजार और इक्विटी निवेश पर दबाव बन सकता है क्योंकि कंपनियों की उधारी लागत बढ़ जाती है। इसलिए रेपो रेट सीधे तौर पर आम लोगों की वित्तीय योजनाओं को प्रभावित करता है।

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