RBI ने रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव, 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा
क्या है खबर?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच भू-राजनीतिक चुनौतियों और व्यापक आर्थिक संकटों को देखते हुए इस बार भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद RBI गर्वनर संजय मल्होत्रा ने बताया कि इसे 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि आपूर्ति में अचानक आए झटकों का असर चौथी तिमाही से मुद्रास्फीति की गति पर दिखना शुरू हो सकता है।
रेपो रेट
दिसंबर में घटाया था रेपो रेट
इससे पहले फरवरी और अप्रैल में हुई MPC की बैठक में भी रेपो रेट को बढ़ाने और घटाने पर कोई फैसला नहीं रखा गया था और इसे अपरिवर्तित रखा था। हालांकि, दिसंबर में हुई समिति की बैठक में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत अंक की कमी की थी और रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत हो गया था। तब से यही बरकरार है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद केंद्रीय बैंक झटकों का सामना करने के लिए आश्वस्त है।
चिंता
विकास दर के अनुमान को घटाया
गर्वनर ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि पूर्वानुमान को पहले के 6.9 से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए आर्थिक विकास दर 6.6, दूसरी तिमाही के लिए 6.3, तीसरी तिमाही के लिए 6.5 और चौथी तिमाही के लिए 6.8 प्रतिशत निर्धारित की है। अप्रैल में MPC बैठक में RBI ने 2026-27 की पहली तिमाही के लिए आर्थिक विकास दर 6.8 प्रतिशत रखी थी।
महंगाई दर
महंगाई दर में होगी बढ़ोतरी
केंद्रीय बैंक ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) द्वारा मापी गई मुद्रास्फीति दर को 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जबकि अप्रैल में यह 4.6 प्रतिशत पर रखा गया था। RBI गवर्नर ने कहा कि तेल की बढ़ी कीमतों का असर घरेलू ईंधन की कीमतों पर धीरे-धीरे पड़ेगा और वाणिज्यिक गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने, औद्योगिक कच्चे माल, रसायन, धातु, रबर और प्लास्टिक उत्पादों की बढ़ती लागत से आने वाले समय में मुद्रास्फीति और भी बढ़ सकती है।
ब्याज
रेपो रेट न बदलने से लोन लेने वालों को फायदा?
रेपो रेट के स्थिर होने से लोगों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि इससे पहले की तिमाहियों में रेट कम हो चुके हैं। होम लोन, पर्सनल लोन और वाहन लोन लेने वाले लोगों को इस बात से राहत जरूर मिलेगी कि लोन दरें न तो बढ़ेंगी और न ही घटेंगी। रेपो रेट स्थिर होने या कम होने से बैंकों को RBI से कम ब्याज दर पर कर्ज मिलेगा तो वह ग्राहकों को भी कम दर पर कर्ज दे सकेंगे।