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स्वास्थ्य बीमा या मेडिकल इमरजेंसी फंड में से क्या है आपके लिए सही?
बीमारियों के खर्चों से निपटने के लिए लोग स्वास्थ्य बीमा का सहारा लेते हैं

स्वास्थ्य बीमा या मेडिकल इमरजेंसी फंड में से क्या है आपके लिए सही?

Feb 17, 2026
09:46 pm

क्या है खबर?

बीमारियों के अचानक से आए खर्चों से निपटने के लिए अक्सर लोग या तो स्वास्थ्य बीमा खरीदते हैं या मेडिकल इमरजेंसी फंड तैयार करते हैं। दोनों का उद्देश्य अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी में आपको और परिवार को वित्तीय झटकों से बचाना है। कई लोगों में इस बात को लेकर संशय रहता है कि दोनों में से कौनसा विकल्प चुनना सही होगा। आइये जानते हैं आपके लिए स्वास्थ्य बीमा लेना सही रहेगा या मेडिकल इमरजेंसी फंड बनाना फायदेमंद है।

मेडिकल इमरजेंसी फंड 

कितना होना चाहिए फंड?

मेडिकल इमरजेंसी फंड वह पैसा है, जिसे आप अप्रत्याशित चिकित्सा खर्चों के लिए अलग रखते हैं। यह एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। आप इस धनराशि को ज्यादा ब्याज दर वाले बचत खाते या लिक्विड म्यूचुअल फंड में रख सकते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर यह आसानी से उपलब्ध हो। अब बात आती है कि इसमें कितना पैसा होना चाहिए तो जानकार बताते हैं कि प्रत्येक सदस्य के लिए 50,000 से 1 लाख रुपये तक जमा होने चाहिए।

फायदे-नुकसान

मेडिकल इमरजेंसी फंड के क्या हैं फायदे?

मेडिकल इमरजेंसी फंड में आपको तुरंत नकद मिल जाता है और किसी क्लेम या कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ती है। इसका उपयाग उन खर्चों के लिए किया जा सकता है, जिन्हें बीमा में कवर नहीं किया जाता है। जहां इसके फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं। अगर, मेडिकल बिल बहुत ज्यादा हो तो आपका जमा फंड खत्म हो सकता है। इसके अलावा पर्याप्त पैसा जमा करने में समय लगता है। इस पर कोई टैक्स छूट भी नहीं मिलती।

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बीमा 

क्या होता है स्वास्थ्य बीमा?

स्वास्थ्य बीमा कंपनियां वार्षिक प्रीमियम शुल्क पर स्वास्थ्य बीमा करती हैं। इसके बदले एक निश्चित सीमा तक आपके चिकित्सा खर्चों का भुगतान किया जाता है। इसमें अस्पताल में भर्ती होना, सर्जरी, डे केयर इलाज, एम्बुलेंस का खर्च और कभी-कभी अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्च भी शामिल होते हैं। अब बात आती है कि कितने का प्लान लेना सही है तो 4 सदस्यों वाले परिवार के लिए 10 लाख रुपये का बीमा करवा सही रहता है।

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फायदे-नुकसान

ये हैं बीमा के फायदे-नुकसान

बीमा कराने पर आपको कम वार्षिक प्रीमियम पर व्यापक कवरेज मिल जाता है और आपकी बचत भी खत्म नहीं होती है। यह बीमा राशि के आधार पर 5 लाख रुपये या उससे अधिक के बिलों को कवर करता है। इसमें प्रीमियम पर 80D के तहत टैक्स में छूट भी मिलती है। कमियों की बात करें तो कुछ बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड होता है, जिससे इलाज के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। क्लेम प्रक्रिया में समय लगता है।

विकल्प

दोनों से किसका करें चयन?

बीमा मेडिकल इमरजेंसी में सुरक्षा की पहली पंक्ति है। यह अस्पताल के बड़े बिलों को कवर करता है, जो आपके आपातकालीन फंड को खत्म कर सकते हैं। दूसरी तरफ मेडिकल इमरजेंसी फंड आपका बैकअप है। यह आपको छोटे चिकित्सा खर्चों के लिए भुगतान करने में मदद करता है, जिनके लिए अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती है या ऐसे खर्च जो बीमा द्वारा कवर नहीं होते हैं। इसलिए, जानकार दोनों विकल्पों को रखना ज्यादा फायदेमंद बताते हैं।

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