HDFC बैंक शेयर में बड़ी गिरावट से LIC समेत इन निवेशकों को हुआ भारी नुकसान
क्या है खबर?
HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद बैंक के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। शेयर करीब 8 प्रतिशत गिरकर 772 रुपये तक पहुंच गया, जो 52 हफ्ते का सबसे निचला स्तर है। इस गिरावट के चलते बैंक का कुल बाजार मूल्य 12 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया। इससे निवेशकों में घबराहट बढ़ी और बाजार में बैंक को लेकर नकारात्मक माहौल बन गया, जिससे पूरे सेक्टर पर भी असर देखने को मिला।
दौलत
निवेशकों की कुल दौलत में भारी कमी
शेयर में गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में बड़ा नुकसान हुआ है। बैंक का मार्केट कैप घटकर 11.88 लाख करोड़ रुपये रह गया, जबकि पहले यह 12.96 लाख करोड़ रुपये था। यानी कुल 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की दौलत साफ हो गई। मार्च महीने में ही स्टॉक 9 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका है, जिससे यह पिछले छह सालों की सबसे खराब मासिक गिरावट की ओर बढ़ता दिख रहा है और निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
नुकसान
किसे कितना नुकसान हुआ?
इस गिरावट से अलग-अलग निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ है। विदेशी निवेशकों (FII) को सबसे ज्यादा झटका लगा, जिनकी हिस्सेदारी 47.70 प्रतिशत है और उन्हें करीब 45,072 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। LIC को 4,510 करोड़ रुपये, म्यूचुअल फंड्स को 25,209 करोड़ रुपये और रिटेल निवेशकों को 8,900 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। वहीं सिंगापुर सरकार को 2,150 करोड़ रुपये, वैनगार्ड को 1,176 करोड़ रुपये और नॉर्वे फंड को 1,151 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है।
सफाई
बैंक और RBI ने दी सफाई
बैंक प्रबंधन और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस स्थिति पर सफाई दी है। अंतरिम चेयरमैन केकी मिस्त्री ने कहा कि बैंक के अंदर कोई बड़ा विवाद या पावर स्ट्रगल नहीं था। RBI ने भी कहा कि बैंक की वित्तीय स्थिति मजबूत है और पूंजी व नकदी पर्याप्त है। इसके साथ ही गवर्नेंस को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं पाई गई है, जिससे निवेशकों को भरोसा दिलाने की कोशिश की गई।
रुख
आगे क्या रह सकता है रुख?
विशेषज्ञों के अनुसार, HDFC बैंक का शेयर अभी दबाव में रह सकता है, क्योंकि तकनीकी संकेत कमजोर बने हुए हैं। स्टॉक अपने प्रमुख औसत स्तरों से नीचे ट्रेड कर रहा है, जो गिरावट के ट्रेंड को दर्शाता है। जानकारों का कहना है कि फिलहाल नई खरीद से बचना चाहिए। करीब 750 रुपये के आसपास सपोर्ट और 850 रुपये के पास रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है, जिससे आगे की दिशा तय होगी।