कर्ज के जाल में मध्यम वर्ग, EMI में जा रही आधी कमाई
भारत का मध्यम वर्ग वर्तमान में पहले से कहीं ज्यादा उधार ले रहा है। आसान किस्तों पर लोन मिलने से नए फोन और गैजेट्स खरीदना बेहद आसान हो गया है, लेकिन 25 साल के नवजोत सिंह की कहानी बताती है कि कर्ज कितनी जल्दी जमा हो सकता है।
वह अपने वेतन का लगभग आधा हिस्सा आईफोन, प्लेस्टेशन, टीवी सेट, वाइन और स्पिरिट्स कोर्स के साथ-साथ घर जाने के ट्रिप के कर्ज चुकाने में खर्च कर देता है।
जैसे-जैसे ब्याज दरें बढ़ रही हैं, इन लोन की किस्तें चुकाना मुश्किल होता जा रहा है। कई लोगों के लिए किस्तें चूकने का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
उपभोक्ता कर्ज GDP का 46 फीसदी
पिछले वित्त वर्ष में घरेलू उधार 36 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड GDP का 46 फीसदी पर पहुंच गया है। हालांकि, यह आंकड़ा अभी भी कई पश्चिमी देशों से कम है, लेकिन भारतीय परिवारों पर इसका भार साफ नजर आ रहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ब्याज दरें 5.5 फीसदी तक बढ़ा दी हैं। नौकरी जाने या सोने की कीमत में गिरावट जैसे हालात को देखते हुए विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि खर्च की यह होड़ जल्द ही खतरनाक साबित हो सकती है। खासकर उन युवाओं के लिए जो एक साथ कई मासिक किस्त चुका रहे हैं।