सरकार चिप उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए दे रही करीब 7,400 अरब रुपये की सब्सिडी
भारत का चिप उद्योग जल्द ही बड़ी तरक्की करने वाला है। उम्मीद है कि देश का चिप बाजार 2026 के 54 अरब डॉलर (करीब 5,000 अरब रुपये) से बढ़कर 2035 तक 350 अरब डॉलर (करीब 33,000 अरब रुपये) पर पहुंच जाएगा।
यह बड़ा उछाल तभी संभव है, जब सरकार की तरफ से प्रोत्साहन और सब्सिडी जैसी मजबूत सहायता मिले। इससे देश में चिप्स का उत्पादन बढ़ेगा और विदेशों हमारी निर्भरता भी कम होगी।
20 फीसदी आयात कम करने का लक्ष्य
फिलहाल, भारत चिप्स के लिए विदेशों पर काफी ज्यादा निर्भर है, लेकिन अब यह स्थिति बदलने वाली है। इसी मकसद से सरकार ने कई सब्सिडी पैकेज शुरू किए हैं।
इनमें 3 पैकेज (ISM 1.0, 2.0, 3.0) 40 अरब डॉलर (करीब 3,700 अरब रुपये) के हैं, वहीं 2 अतिरिक्त पैकेज (ISM 4.0, 5.0) 20-20 अरब डॉलर (करीब 1,850-1,850 अरब रुपये) के हैं।
इस तरह कुल 80 अरब डॉलर (करीब 7,400 अरब रुपये) की बड़ी मदद दी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य आयात पर निर्भरता घटाना और देश में ही चिप्स बनाने की क्षमता को बढ़ाना है।
2035 तक भारत का लक्ष्य है कि उसके अपने कारखाने देश के सेमीकंडक्टर आयात बिल का 20 फीसदी से ज्यादा हिस्सा पूरा करें। यह घरेलू खपत और निर्यात दोनों से ही संभव हो पाएगा।