बांग्लादेश में हिंदुओं के बाद अब कट्टरपंथियों का सूफी दरगाह, उर्स और संगीत पर हमला- रिपोर्ट
क्या है खबर?
बांग्लादेश में कट्टरपंथी समूह के निशाने पर हिंदुओं के बाद अब सूफी हैं। यह पुष्टि ढाका स्थित इस्लामिक सूफी संगठन मकान: सेंटर फॉर सूफी हेरिटेज की एक रिपोर्ट में हुई है। न्यूज़18 के मुताबिक, इस रिपोर्ट को मानें तो इस वर्ष 1 जनवरी से 30 जून के बीच बांग्लादेश भर में 6 मजारों को निशाना बनाया गया है। इसमें अप्रैल में कुश्तिया की पीर अब्दुर रहमान की मजार पर 300 लोगों की भीड़ का हमला और आगजनी शामिल है।
हमला
ढाका में भी मजार पर हुआ हमला
इससे एक महीने पहले, मार्च में 100 लोगों ने सिलहट में हजरत इब्राहिम शाह के मजार पर उर्स उत्सव के लिए इकट्ठा श्रद्धालुओं पर हमला किया। रिपोर्ट के मुताबिक, हमला करने वालों का विरोध उर्स में बजाए जा रहे संगीत से था। ढाका के मीरपुर में स्थित शाह अली बगदादी मजार, कुश्तिया की हजरत शाह दरगाह शरीफ, बरिशाल की हबीब शाह दरबार शरीफ और छतग्राम की हजरत लाल मिया शाह मजार को भी निशाने पर लिया गया था।
जांच
मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में 97 मजारों पर हमला
रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रवृत्ति 2026 में शुरू नहीं हुई। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के समय 97 मजारों को निशाना बनाया गया, जिसमें 3 लोग मारे गए और 468 लोग घायल हुए थे। उनके कार्यकाल में राजबारी स्थित नूरल पगला मजार पर हमलावरों ने पीर के शव को कब्र से निकालकर जला दिया था, लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सत्ता संभालने पर भी हमले कम नहीं हुए हैं।
हमला
क्या BNP के शासन में कट्टरपंथियों के हौसले हुए बुलंद?
बांग्लादेश में बढ़े हमलों को देखते हुए सूफी बाउल संगीत के कलाकार भी डरे हुए हैं। कलाकार नुपुर नादिया कहती हैं कि पहले महीने में 15-20 शो होते थे, जो अब बिल्कुल खत्म हैं। बाउल संगीत एक पारंपरिक लोककला है जिन्हें कट्टरपंथी समूह गैर-इस्लामिक बताते हैं। सवाल उठ रहा है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के सत्ता संभालने के बाद कट्टरता में कोई नहीं है। पहली बार एक 32-पृष्ठ की तथ्य-जांच रिपोर्ट औपचारिक रूप से परिस्थितियों का विश्लेषण करती है।