पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के लिए गन्ने की जगह मक्का का होगा इस्तेमाल
भारत सरकार ने हाल ही में ऐलान किया है कि नवंबर से तेल कंपनियां पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के लिए गन्ने का रस, शुगर सिरप या B-हैवी मोलासेस का इस्तेमाल नहीं करेंगी।
इसकी बजाय, करीब 11 अरब लीटर इथेनॉल जुटाने के लिए वे मक्का और C-हैवी मोलासेस जैसे दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल करेंगी। इसका मुख्य मकसद है देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना, खासकर हाल की मौसमी परेशानियों को देखते हुए। साथ ही, देशभर में E20 पेट्रोल को बढ़ावा देना भी इस योजना का हिस्सा है।
चीनी उत्पादक राज्यों में बढ़ी कीमत
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े चीनी उत्पादक राज्यों में चीनी की कीमतें बढ़ गई है और इसकी आपूर्ति भी अनिश्चित हो गई है।
मक्का और अतिरिक्त चावल जैसी दूसरी फसलों पर निर्भर होकर भारत उम्मीद कर रहा है कि वह चीनी की बढ़ती कीमतों या इसकी कमी का जोखिम उठाए बिना ईंधन मिश्रण कार्यक्रम को मजबूती से जारी रख पाएगा।
यह कदम ऊर्जा को और टिकाऊ बनाने के साथ-साथ केवल एक फसल पर निर्भरता कम करने की एक बड़ी योजना का भी हिस्सा है।