सरकार ने दी विमानों के ईंधन में इथेनॉल मिलाने की अनुमति, जानिए क्या होगा फायदा
क्या है खबर?
देश के विमानन क्षेत्र में अब एक बड़ा बदलाव आने वाला है। सरकार ने सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) को मंजूरी दे दी है। इससे विमानों में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक ईंधन एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में अब दूसरे वैकल्पिक ईंधन मिलाए जा सकेंगे। इसमें सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन या इथेनॉल मिश्रित किया जा सकता है। इसका मतलब है कि विमानों का फ्यूल थोड़ा ग्रीन बनने जा रहा है, जो पर्यावरण के भी अनुकूल होगा।
बदलाव
नियमों में किया बदलाव
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इसके लिए विमानन टरबाइन ईंधन (विपणन विनियमन) आदेश, 2001 में संशोधन किया है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अधिसूचित ये परिवर्तन तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और इनसे टिकाऊ विमानन ईंधन को अपनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है। संशोधन में पूर्ववर्ती आदेश के कुछ पुराने संदर्भों को भी हटा दिया गया है। संशोधित ढांचा ATF की परिभाषा का विस्तार करते हुए इसमें सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन के साथ मिश्रण को शामिल करता है।
SAF
क्या है SAF?
SAF ऐसा ईंधन है, जो प्रकृति को कम नुकसान पहुंचाता है। इसे खेती के बचे हुए अवशेष, इस्तेमाल किए गए तेल और दूसरे जैविक स्रोतों से तैयार किया जाता है। इसे पर्यावरण के लिए बेहतर माना जाता है। सरकार की मंजूरी के बाद अब एयरलाइंस कंपनियां अपने फ्यूल में SAF, इथेनॉल और दूसरे ऑयल मिलाकर इस्तेमाल कर सकेंगी। इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि विमानों से निकलने वाला धुआं और प्रदूषण कम होगा।
वैट
सरकार कर रही वैट कम करने का प्रयास
CNBC-आवाज की रिपोर्ट के अनुसार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ATF पर वैट कम करने के लिए दिल्ली, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से बातचीत कर रहा है, क्योंकि ईंधन की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष के बढ़ने के बाद जेट ईंधन की कीमतों में आई तीव्र वृद्धि के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो गई हैं, जिसके चलते यह कदम उठाना जरूरी हो गया है।