गूगल वॉइस असिस्टेंट गोपनीयता से जुड़े मुकदमे में करेगी समझौता, करना होगा 620 करोड़ रुपये भुगतान
क्या है खबर?
टेक दिग्गज कंपनी गूगल ने वॉइस असिस्टेंट की गोपनीयता से जुड़े मुकदमे में समझौता करने पर सहमति जताई है। इस मामले में कंपनी ने 6.8 करोड़ डॉलर (लगभग 620 करोड़ रुपये) चुकाने का फैसला किया है। आरोप है कि गूगल असिस्टेंट बिना अनुमति यूज़र्स की बातचीत सुनता था। वादियों का कहना है कि कुछ शब्द वेक वर्ड जैसे लगते थे, जिससे असिस्टेंट अपने आप चालू हो जाता था और निजी बातचीत रिकॉर्ड हो जाती थी।
आरोप
निजी बातचीत से जुड़े विज्ञापन दिखाने का आरोप
मुकदमे में दावा किया गया कि गूगल असिस्टेंट ने ऐसी बातचीत भी सुनी, जिसे उसे नहीं सुनना चाहिए था। इन रिकॉर्ड की गई जानकारियों का इस्तेमाल विज्ञापन दिखाने में किया गया। यूजर्स को इसकी जानकारी नहीं थी कि उनकी निजी बातें इस तरह इस्तेमाल हो सकती हैं। शिकायतकर्ताओं ने इसे गंभीर गोपनीयता उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि किसी भी तकनीकी प्लेटफॉर्म को यूजर्स की अनुमति के बिना बातचीत सुनने या डाटा स्टोर करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
प्रतिक्रिया
नियमों का उल्लंघन करने से इनकार
रॉयटर्स के मुताबिक, गूगल ने नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी तरह के कदम से इनकार किया है। इसके बावजूद कंपनी ने लंबी कानूनी प्रक्रिया और खर्च से बचने के लिए समझौते का रास्ता चुना है। अदालत में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, यह एक प्रारंभिक क्लास-एक्शन समझौता है। इसे पिछले हफ्ते शुक्रवार को दायर किया गया था। अब इस समझौते को अमेरिकी जिला न्यायाधीश बेथ लैबसन फ्रीमैन की मंजूरी मिलना बाकी है।
अन्य
असिस्टेंट से दूरी और पुराने मामलों की पृष्ठभूमि
गूगल पिछले एक साल से अपने गूगल असिस्टेंट प्लेटफॉर्म से धीरे-धीरे दूरी बना रही है और उसकी जगह जेमिनी टूल को आगे बढ़ा रही है। इससे पहले जनवरी, 2025 में भी ऐसा ही एक मामला लगभग 870 करोड़ रुपये के समझौते में खत्म हुआ था। उस केस में प्रति डिवाइस करीब 20 डॉलर (लगभग 1,800 रुपये) मिलने की बात सामने आई थी। कई लोगों को यह रकम कम लगती है, लेकिन कानूनी व्यवस्था में ऐसे फैसले आम माने जाते हैं।