भारत में चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए देशी-विदेशी कंपनियों ने लगाए बड़े दांव
सेमिकॉन इंडिया 2026 में दुनिया की दिग्गज चिप कंपनियों ने भारत की चिप निर्माण क्षमता को बढ़ाने का संकल्प लिया।
देश का सेमीकॉन 2.0 प्रोग्राम सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय कंपनियां मिलकर देश को सेमीकंडक्टर की दुनिया का एक बड़ा खिलाड़ी बनाने के लिए हाथ मिला रही हैं।
ASML ने भारत में खोला अपना दफ्तर
ASML ने भारत में अपना दफ्तर खोल लिया है। इसके चीफ स्ट्रेटेजिक सोर्सिंग और प्रोक्योरमेंट ऑफिसर एलन वेन ने बताया, "2032 तक भारत की यह योजना और महत्वाकांक्षा है कि वह अपनी कुल सेमीकंडक्टर मांग का 15 से 25 फीसदी वेफर फैब यहीं बनाए। इसका सीधा मतलब है कि 2032 तक देश में कई ऐसे फैब बन चुके होंगे।" दूसरी तरफ, एप्लाइड मैटेरियल्स कंपनी ने अगले 10 सालों में नए प्रोजेक्ट्स पर 5 अरब डॉलर (करीब 41,000 करोड़ रुपये) लगाने की बात कही है। इसी प्रकार, लैम रिसर्च ने एक सिलिकॉन फैसिलिटी के लिए 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करने का वादा किया है। इसके अलावा, एप्लाइड मैटेरियल्स ने कर्नाटक सरकार के साथ रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और उत्पादन उपकरणों के लिए 3,600 करोड़ रुपये का एक समझौता भी किया है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने भी गुजरात और असम में लोकल सप्लाई चेन बनाने के लिए 16 बड़े समझौते किए हैं। यह सब साफ संकेत देता है कि बड़ी-बड़ी कंपनियां भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपार संभावनाएं देख रही हैं और वे भारत में टेक्नोलॉजी के भविष्य को गढ़ने में अपनी भूमिका निभाना चाहती हैं।