MDR की कमाई से बैंकों की पेमेंट सिस्टम बेहतर बनाने की योजना
भारतीय बैंक अपनी यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) रणनीति पर नए सिरे से विचार कर रहे हैं। इसकी वजह यह है कि 15 अक्टूबर से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू हो रहा है।
इस बदलाव के बाद 2,000 रुपये से ज्यादा के व्यापारिक भुगतान पर 40 बेसिस पॉइंट का MDR लिया जाएगा। इससे बैंकों को अच्छी-खासी कमाई होने की उम्मीद है। इसी के चलते वे अब बेहतर भुगतान तकनीक में ज्यादा निवेश करने का मन बना रहे हैं।
एजेंट आधारित सेवाओं पर ज्यादा ध्यान
नए राजस्व के चलते बैंक अपने पेमेंट सिस्टम्स को बेहतर बनाने की तैयारी कर रहे हैं, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एजेंट आधारित सेवाओं पर उनका ज्यादा ध्यान है।
दूसरी ओर, भारत का IT उद्योग मुश्किलों का सामना कर रहा है। इसकी वजह यह है कि गूगल और मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियां अब आउटसोर्सिंग की बजाय AI और ऑटोमेशन पर ज्यादा जोर दे रही हैं।
इसका सीधा असर उन नौकरियों पर पड़ेगा, जो बार-बार दोहराए जाने वाले सामान्य कामों पर आधारित हैं। ऐसे में पारंपरिक आउटसोर्सिंग का भविष्य अब उतना सुरक्षित नहीं दिख रहा है।