सोने के बाद नौकरी गई, कर्मचारी ने कंपनी से मांगा 963 करोड़ रुपये का मुआवजा
क्या है खबर?
सॉफ्टवेयर कंपनी गिटपॉड की पूर्व अधिकारी शैनन बर्न्स ने कंपनी से 7.6 करोड़ पाउंड (लगभग 963 करोड़ रुपये) का मुआवजा मांगा है। द इंडिपेंडेंट के अनुसार, ब्रिटेन के बर्मिंघम एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल ने उन्हें इस रकम का दावा आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। कंपनी चाहती थी कि बर्न्स का दावा 10 लाख पाउंड तक सीमित रहे, लेकिन ट्रिब्यूनल ने उसकी मांग नहीं मानी। हालांकि, अभी बर्न्स को कोई पैसा नहीं मिला है।
विवाद
सॉना में सोने के बाद हुआ विवाद
यह पूरा मामला अप्रैल, 2023 की एक कंपनी ट्रिप से जुड़ा है। बर्न्स ऑस्ट्रिया में टीम के साथ गई थीं।
एक रात वह अपने कमरे की चाबी साथ रखना भूल गईं और कमरे में नहीं जा सकीं। इसके बाद उन्होंने सॉना में रात बिताई। ट्रिप खत्म होने के बाद कंपनी ने उनकी जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए।
कुछ समय बाद जून, 2023 में उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। बर्न्स ने बाद में कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कराया।
आरोप
कंपनी पर लगाया भेदभाव का आरोप
बर्न्स ने कहा कि उन्हें नौकरी से निकालने में उनकी दिव्यांगता का भी असर पड़ा।
उन्होंने बताया कि उन्हें ADHD है और कंपनी को इसकी जानकारी पहले से थी। 2025 में ट्रिब्यूनल ने उनके दिव्यांगता से जुड़े दावे को सही माना और कहा कि उनके साथ भेदभाव हुआ था।
हालांकि, सेक्स भेदभाव से जुड़ा उनका अलग दावा खारिज कर दिया गया। अब अगली सुनवाई में यह देखा जाएगा कि नौकरी जाने से उन्हें कितना आर्थिक नुकसान हुआ है।
रकम
मुआवजे की रकम अभी तय नहीं
बर्न्स के दावे में नौकरी जाने के बाद भविष्य में होने वाली कमाई और गिटपॉड की हिस्सेदारी से होने वाले संभावित नुकसान को भी शामिल किया गया है।
गिटपॉड ने इस रकम को बहुत ज्यादा बताते हुए इसे 10 लाख पाउंड तक सीमित करने की मांग की थी। जज ने यह मांग खारिज कर दी।
ट्रिब्यूनल ने कंपनी से OpenAI को गिटपॉड की बिक्री से जुड़ी जानकारी भी मांगी है। हालांकि, मिलेगा या नहीं, यह अभी तय नहीं हुआ है।