देश में और महंगे होगे इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, जानिए क्या है इसकी वजह
क्या है खबर?
अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग बढ़ती लागत का दबाव झेल रहा है। कंपनियों ने चेतावनी दी है कि युद्धविराम के बाद भी सप्लाई चेन को स्थिर होने में समय लगेगा, जिससे निकट भविष्य में इनपुट लागत ऊंची बनी रहेगी। निर्माताओं ने वाशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, पंखे और कूलर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है। व्यवधान जारी रहते हैं और हालात सामान्य होने में देरी होती है तो आगे और बढ़ोतरी हो सकती है।
कारण
इस कारण लागत में आया उछाल
कच्चे तेल से बने प्लास्टिक की मांग में वृद्धि और पाउडर कोटिंग एल्यूमीनियम-आधारित प्रक्रियाओं में बाधाओं के कारण निर्माण लागत में काफी वृद्धि हुई है। माल ढुलाई और रसद खर्चों में वृद्धि के साथ इन कारकों ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की इनपुट लागत को 10-15 फीसदी तक बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि कंपनियों ने लागत में हुई बढ़ोतरी का लगभग 70 फीसदी हिस्सा उपभोक्ताओं पर डाल दिया है, जबकि शेष 30 फीसदी का आकलन किया जा रहा है।
कच्चा तेल
कच्चे तेल का पड़ता है सीधा असर
नोबल ग्रुप के प्रबंध निदेशक जसराज एस कालरा ने मनीकंट्रोल को बताया, "लागत में सबसे बड़ा योगदान प्लास्टिक का है, जो इस वृद्धि का लगभग 50 फीसदी हिस्सा है। प्लास्टिक कच्चे तेल से बनता है, इसलिए तेल बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर लागत पर पड़ता है।" इसका प्रभाव केवल बड़े घरेलू उपकरणों तक ही सीमित नहीं है। पंखे और LED लाइटिंग के निर्माता भी इनपुट लागत के दबाव और सोर्सिंग चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।