अमेरिकी-यूरोप नियामकों की AI बैंकिंग पर पैनी नजर, सता रही यह चिंता
अमेरिका और यूरोप के नियामक इस बात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं कि बैंक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं। उन्हें चिंता है कि कहीं इससे वित्तीय स्थिरता को खतरा न हो जाए।
फेडरल रिजर्व तो AI के एडवांस मॉडल्स की जांच कर ही रहा है, साथ ही चीनी तकनीक के साथ उसके किसी भी जुड़ाव पर भी नजर बनाए हुए है।
दूसरी ओर, जैसे-जैसे AI और ज्यादा स्मार्ट होता जा रहा है यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूरोपीय अधिकारी चाहते हैं कि बैंक अपनी आपातकालीन या बैकअप योजनाओं को और मजबूत करें।
साइबर खतरों से निपटने वाले सिस्टम बनाने की मांग
अमेरिका में नियामक यह पता लगा रहे हैं कि AI साइबर खतरों को पहचानने में कैसे काम आ सकता है। इसके साथ ही वे यह भी पक्का करना चाहते हैं कि किसी भी फैसले में आखिरी बात इंसान की ही हो।
यूरोप चाहता है कि बैंक इस तकनीक से होने वाले साइबर हमलों से निपटने के लिए मजबूत और अपने दम पर चलने वाले सिस्टम तैयार करें, लेकिन फिलहाल उन्होंने कोई नए नियम नहीं बनाए हैं।
एक बात पर दोनों पक्ष सहमत हैं। AI का इस्तेमाल कहां-कहां हो रहा है, इसकी पूरी जानकारी हो और पक्की बैकअप योजनाएं हों तो तकनीक के आगे बढ़ने के साथ बैंकिंग को सुरक्षित रखा जा सकता है।