डॉलर के मुकाबले 96.1725 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया
भारतीय रुपया मंगलवार (14 जुलाई) को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.1725 के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
इसकी मुख्य वजह वैश्विक तनाव है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। बाजार खुलने के साथ ही रुपया कमजोर स्थिति में था और इसके बाद भी गिरावट जारी रही।
फिलहाल यह 96.16 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो मई के बाद इसका सबसे खराब प्रदर्शन है। बाजार पर नजर रखने वालों के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय है।
ट्रंप की धमकी से बढ़े ब्रेंट क्रूड के दाम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले सामानों पर 20 फीसदी शुल्क लगाने की धमकी दी। इसके बाद कच्चे तेल के दाम रातों-रात तेजी से बढ़ गए।
ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर (7,400 रुपये) प्रति बैरल से उछलकर 85 डॉलर (करीब 8,000 रुपये) प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी तेल आयात करता है।
ऐसे में जब भी तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। इससे महंगाई बढ़ती है और सरकार के बजट पर भी अतिरिक्त बोझ आ जाता है।
DBS बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री और कार्यकारी निदेशक राधिका राव बताती हैं कि भले ही देश में बड़े पैमाने पर पूंजी का प्रवाह हो रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में रुपये को खास मजबूती नहीं मिल पा रही है।