डीप टेक के विचारों को हकीकत में बदलने के बीच आ रही पूंजी की समस्या
भारत में डीप टेक का क्षेत्र नए-नए विचारों से गुलजार है, लेकिन इनको जमीनी हकीकत बनाना या सफल कारोबार में बदलना आसान नहीं होता, खासकर जब बात फंडिंग जुटाने की आती है।
मनीकंट्रोल स्टार्टअप कॉन्क्लेव 2026 में संस्थापकों ने बताया कि निवेशक अब इस क्षेत्र में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। फिर भी शुरुआती फंडिंग राउंड के बाद बड़ी पूंजी जुटाना अभी भी एक बड़ी चुनौती है। यही वजह है कि कई स्टार्टअप अपनी तरक्की जारी रखने के लिए अब भारत से बाहर ग्लोबल कैपिटल की ओर देख रहे हैं।
संस्थापकों ने बताई फंडिंग की रणनीतियां
स्टार्टअप के इन दिग्गजों ने अपनी फंडिंग जुटाने और कारोबार को बढ़ाने की रणनीतियों पर खुलकर बात की। ईप्लेन कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और सह संस्थापक सत्य चक्रवर्ती ने सावधान किया कि अगर, कंपनी के पास कोई ठोस बिजनेस मॉडल न हो तो आसान सीड मनी जोखिम भरी हो सकती है।
स्काईरूट एयरोस्पेस के सह संस्थापक नागा भरत डाका ने बताया कि तकनीकी रूप से पूरी तरह से तैयार रहना निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए बहुत जरूरी है। पिक्सेल के सह संस्थापक क्षितिज खंडेलवाल ने बताया कि स्पेस-टेक फंडिंग में रिकॉर्ड 10 करोड़ डॉलर (करीब 950 करोड़ रुपये) मिलने के बाद उन्होंने सैटेलाइट इमेजिंग को कैसे बड़ा किया।
दूसरी तरफ, एथर एनर्जी के सह संस्थापक स्वप्निल जैन ने समझाया कि कंपनी के शेयर सार्वजनिक होने से निवेशकों के लिए सब कुछ और ज्यादा पारदर्शी हो गया, जिससे उनके भविष्य में भरोसा भी मजबूत हुआ।