कच्चे तेल और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स से भारतीय बॉन्ड्स में तेजी
सोमवार (26 अक्टूबर) को भारतीय सरकारी बॉन्ड्स को आखिरकार थोड़ी राहत मिली और इसका श्रेय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स में देखे गए सकारात्मक रुझान को जाता है।
एशिया में ब्रेंट क्रूड में 2.14 फीसदी की गिरावट के बाद यह 114 डॉलर (करीब 10,000 रुपये) प्रति बैरल पर आ गया, जिससे 2036 के 6.94 फीसदी वाले बॉन्ड की यील्ड घटकर 7.4640 फीसदी हो गई। यह उन बाजारों के लिए कुछ राहत लेकर आया, जो दुनियाभर में सप्लाई को लेकर चिंतित थे।
विदेशी निवेश की निकासी का असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, जिस वजह से कच्चे तेल की कीमतों में हर उतार-चढ़ाव का सीधा असर यहां होता है। हाल ही में विदेशी निवेशकों ने अगस्त से लेकर अब तक भारतीय सरकारी बॉन्ड्स से 153 अरब रुपये निकाल लिए हैं। यह 1998 के बाद से यील्ड में बढ़ोतरी का सबसे लंबा दौर रहा है।
अब सभी लोग महंगाई पर अपनी नजर गड़ाए हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि देश-विदेश दोनों जगहों पर ब्याज दरें और बढ़ेंगी। आने वाले महीनों में इस वजह से बॉन्ड मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।