पूर्व RBI गवर्नर ने की बड़े UPI लेन-देन पर शुल्क लगाने की पैरवी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव का मानना है कि यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) सिस्टम को चलाने के असली खर्चों को पूरा करने के लिए अब कुछ लेन-देन पर शुल्क लगाना जरूरी हो सकता है। एक किताब के विमोचन कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने बताया कि भले ही UPI के जरिए पैसे भेजना अभी मुफ्त है, लेकिन बैंकों को परदे के पीछे से अभी भी खर्च उठाना पड़ता है।
बैंक दूसरे तरीकों से करेंगे भरपाई
सुब्बाराव ने यह सुझाव दिया है कि शुरुआत में ज्यादा मूल्य वाले UPI पेमेंट्स पर शुल्क लगाया जाए, ताकि आम लोगों और असंगठित क्षेत्र से जुड़े लोगों पर इसका ज्यादा बोझ न पड़े।
उन्होंने इस बात की भी चेतावनी दी कि अगर, बैंक इसी तरह मुफ्त UPI सेवा देते रहे तो वे इसकी भरपाई फिक्स्ड डिपोजिट (FD) पर मिलने वाले ब्याज को कम करके या लोन की लागत बढ़ाकर कर सकते हैं।
महिलाएं कम करती हैं UPI का इस्तेमाल
पूर्व गवर्नर ने यह भी बताया कि भले ही आधे जन धन खाते महिलाओं के नाम पर हैं, फिर भी UPI ट्रांजैक्शन में उनकी हिस्सेदारी एक चौथाई से भी कम है।
इसकी वजह अक्सर निजता को लेकर चिंताएं या डिजिटल साधनों के इस्तेमाल में आत्मविश्वास की कमी होती है। सुब्बाराव का कहना है कि असली वित्तीय समावेशन का मतलब केवल अकाउंट्स खोलना नहीं है। उन्होंने डाटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया, ताकि बैंक सभी तरह के कर्ज लेने वालों को अच्छी मदद दे सकें।