कच्चा तेल फिर हुआ महंगा; ब्रेंट 91 डॉलर के पार, जानिए तेजी की बड़ी वजह
क्या है खबर?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त का सिलसिला लगातार जारी है। आज मंगलवार (18 अगस्त) को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 27 सेंट यानी 0.3 प्रतिशत बढ़कर 91.14 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI 42 सेंट बढ़कर 85.04 डॉलर प्रति बैरल हो गया। कारोबार के दौरान WTI 85.37 डॉलर तक पहुंचा, जो 31 जुलाई के बाद उसका सबसे मजबूत स्तर रहा। इससे बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ी है।
युद्ध
युद्ध खत्म होने की उम्मीद कमजोर
कच्चे तेल में तेजी की बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध है।
इस संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीदें कमजोर पड़ रही हैं, जिससे बाजार में चिंता लगातार बढ़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच कई अहम मुद्दों पर अभी सहमति नहीं बनी है। अमेरिका ने सीजफायर बढ़ाने से भी इनकार किया है।
इसके अलावा, ईरान ने ज्यादा आक्रामक रुख अपनाने के संकेत दिए हैं, जिससे हालात और तनावपूर्ण बने हुए हैं और बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है।
होर्मुज
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ी चिंता
तेल की कीमतों पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी अनिश्चितता भी असर डाल रही है।
यह दुनिया के अहम तेल सप्लाई रास्तों में शामिल है और यहां किसी भी रुकावट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ईरान इस जलमार्ग के प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ बातचीत कर रहा है, जबकि अमेरिका इसमें शामिल नहीं है।
जहाजों पर हमलों की खबरों ने सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ाई है, जिससे तेल बाजार में दबाव बना हुआ है।
सप्लाई
सप्लाई रुकने के डर से तेजी
मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई को लेकर बनी चिंता भी कीमतों को सहारा दे रही है।
संघर्ष के कारण इस साल कच्चे तेल के दाम करीब 50 प्रतिशत बढ़ चुके हैं। हालांकि, खाड़ी के तेल उत्पादक होर्मुज के बाहर से कार्गो भेजने के रास्ते तलाश रहे हैं। सऊदी अरब भी दूसरे रास्तों से तेल भेज रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, तनाव बढ़ने पर ब्रेंट 95 डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव और ज्यादा बढ़ सकता है।