अमेरिका-ईरान के बीच शांति की उम्मीद से तेल की कीमतों में मामूली गिरावट
मंगलवार (21 जुलाई) को तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट देखने को मिली। हालांकि, इस दौरान सैन्य हमले और आपूर्ति से जुड़े खतरे बने रहे।
इस गिरावट की वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशें बताई जा रही हैं। ब्रेंट क्रूड फिसलकर 88.87 डॉलर (करीब 8,400 रुपये) प्रति बैरल पर आ गया, वहीं अमेरिकी क्रूड 82.47 डॉलर (करीब 7,800 रुपये) पर टिका रहा। ये दोनों ही अपने पिछले ऊंचे स्तरों से नीचे रहे।
हूती विद्रोहियों की धमकी से बढ़ा तनाव
ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के समुद्री मार्गों को रोकने की धमकी दी है। अगर, ऐसा होता है तो इसका पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
इस बीच, ईरान ने बताया है कि उसे मध्यस्थों से युद्धविराम का प्रस्ताव मिला है। इस प्रस्ताव से फरवरी में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद भड़के संघर्ष को खत्म करने की उम्मीद जगी है।
विश्लेषकों का मानना है कि ये शांति वार्ताएं फिलहाल तेल की कीमतों को बहुत तेजी से बढ़ने से रोके हुए हैं, लेकिन कूटनीति सफल नहीं होती है तो हालात फिर से खराब हो सकते हैं।