AI डाटा सेंटर शहरों की बिजली व्यवस्था पर डालेंगे भारी दबाव
बड़े शहरों के पास बन रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डाटा सेंटर शहर की बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव डालेंगे। यह बात क्लीनमैक्स एनवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस के प्रबंध निदेशक कुलदीप जैन ने कही है।
उनका कहना है कि असली अड़चन पानी नहीं, बल्कि बिजली है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे विशाल सेंटर्स को रिन्यूएबल एनर्जी के स्रोतों के करीब ही बनाया जाना चाहिए। मुंबई में तो पहले से तय डाटा सेंटर्स की क्षमता शहर की कुल अधिकतम मांग को भी पार कर चुकी है।
30 फीसदी तक बढ़ सकती है बिजली की मांग
एक बड़ा AI डाटा सेंटर उतनी बिजली खर्च करता है, जितनी करीब 1 लाख घरों में इस्तेमाल होती है। हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में ऐसे कई और सेंटर बनने वाले हैं, जिससे विशेषज्ञों का अनुमान है कि बिजली की मांग 20 से 30 गुना बढ़ सकती है।
इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत बड़े पैमाने पर तैयारी कर रहा है। देश का लक्ष्य है कि भविष्य में अपनी कुल ऊर्जा क्षमता का 70 फीसदी हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से पूरा किया जाए।