चीन के इस कदम से भारतीय सोलर उद्योग को लगा झटका
चीन 12 मुख्य सोलर टेक्नोलॉजी के निर्यात पर सख्ती करने की तैयारी में है। इसमें वेफर और पॉलीसिलिकॉन जैसी चीजें शामिल हैं, जिन पर भारत अपने सोलर पैनल बनाने के लिए बहुत निर्भर करता है।
बिजिंग का यह कदम देश के लिए अपने देश में सोलर विनिर्माण को बढ़ाना और स्वच्छ ऊर्जा के अपने लक्ष्यों को पाना मुश्किल कर सकता है।
भारतीय कंपनियां तलाश रहीं विकल्प
भारतीय सोलर उद्योग के बड़े नाम अब अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। प्रीमियर एनर्जीज के मुख्य व्यवसाय अधिकारी (CBO) और निदेशक विनय रस्तोगी ने बताया कि फिलहाल जो प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, उन पर तो असर नहीं होगा, लेकिन नई टेक्नोलॉजी के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि चीन के दबदबे की वजह से इंगोट का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। भारतीय सोलर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के महासचिव अमित मनोहर का कहना है कि जर्मनी या जापान जैसे देशों के साथ मिलकर काम करने से फायदा मिल सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि भले ही चीन पूरी तरह से प्रतिबंध न लगाए, लेकिन उपकरण मिलने में देरी से काम की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। खासकर, जब 2028 के लिए नए मैन्युफैक्चरिंग मानक तय किए गए हैं, तब यह और भी बड़ी चुनौती होगी।