भारत में महंगे साबित हो रहे ChatGPT के विज्ञापन
27 अगस्त को लॉन्च हुए ChatGPT के विज्ञापन भारतीय मार्केटिंग करने वाले (मार्केटर्स) को कुछ खास पसंद नहीं आ रहे हैं। इन विज्ञापनों में ग्राहकों में बदलने की दर (कंवर्जन रेट) 1.5 फीसदी से भी कम है, वहीं एक क्लिक की लागत 200 से 400 डॉलर (करीब 19,000-38,000 रुपये) तक पहुंच रही है। ऐसे में कई ब्रांड्स को ये विज्ञापन गूगल या मेटा के मुकाबले काफी महंगे लग रहे हैं, जिनके विकल्प ज्यादा किफायती हैं।
टाटा न्यू और ट्रेया जैसे 50 से ज्यादा ब्रांड्स ने इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित विज्ञापनों को आजमाया है, लेकिन ज्यादातर अभी भी ऐसे प्लेटफॉर्म्स को पसंद करते हैं, जहां लक्ष्य निर्धारण बेहतर हो और नतीजे भी साफ दिखें।
विज्ञापनों पर अभी भी असमंजस में मार्केटर्स
मार्केटर्स का कहना है कि वे अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ChatGPT के विज्ञापन फायदेमंद हैं या नहीं। कुछ लोग इनसे उम्मीद लगाए बैठे हैं, खासकर ऑटोमोबाइल या रियल एस्टेट जैसे सेक्टर्स के लिए, जहां ग्राहक खरीदारी से पहले काफी रिसर्च करते हैं, लेकिन क्विक-कॉमर्स और ई-कॉमर्स के लिए प्रति ग्राहक ज्यादा लागत फिलहाल फायदे का सौदा नहीं लग रही है।
मोबावेन्यू AI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ईशान जोशी ने इस बारे में कहा, "एक बात जो हमें बिल्कुल साफ है, वह यह कि यह हर किसी के लिए नहीं है। फिर भी हम इसे एक बेहतरीन चैनल मानते हैं। इसमें ऐसे यूजर्स होते हैं, जिनकी खरीदने की इच्छा ज्यादा होती है। अगर, यह आपकी श्रेणी से मेल खाता है तो आप इसमें शुरुआती निवेशक बन सकते हैं।"
हालांकि, कुछ ब्रांड्स ने ChatGPT के एडवरटाइजिंग इकोसिस्टम में हिस्सा लिया है, इसलिए यह देखना बाकी है कि ये AI विज्ञापन कितने सफल होते हैं।