CBDT ने क्रिप्टो सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए जारी किए नए नियम
भारत के टैक्स विभाग केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने क्रिप्टो सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए एक नया दिशा-निर्देश जारी किया है।
इनमें बताया गया है कि उन्हें आयकर अधिनियम 2025 के तहत अपने लेन-देन की रिपोर्ट कैसे देनी होगी। इसका मकसद कोई नए टैक्स लगाना नहीं है, बल्कि रिपोर्टिंग से जुड़े नियमों को ज्यादा साफ करना है।
यह फैसला अंतरराष्ट्रीय मानकों (OECD के CARF) के भी हिसाब से है। इससे भारत दूसरे देशों के साथ क्रिप्टो टैक्स से जुड़ी जानकारी आसानी से साझा कर पाएगा और टैक्स चोरी पर लगाम लगाने में भी मदद मिलेगी।
सर्विस प्रोवाइडर्स को लेन-देन रिपोर्ट करने होंगे
क्रिप्टो एसेट्स की अब आधिकारिक परिभाषा तय कर दी गई है। इसके तहत, इन्हें मूल्य का एक ऐसा डिजिटल रूप माना जाएगा, जो क्रिप्टोग्राफिक रूप से सुरक्षित 'डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर' या मिलती-जुलती तकनीक पर काम करता है। सर्विस प्रोवाइडर्स को बड़े लेन-देन (करीब 48 लाख रुपये से ऊपर के रिटेल पेमेंट) का विवरण रिपोर्ट करना होगा। साथ ही, उन्हें यूजर्स की पहचान भी करनी होगी, भले ही वे भारत में न रहते हों। आम लोगों पर इस वजह से कोई अतिरिक्त फाइलिंग का बोझ नहीं आएगा।
हालांकि, उन्हें सलाह दी गई है कि वे अपने क्रिप्टो लेन-देन का रिकॉर्ड सही से रखें। इससे उनका हिसाब-किताब दुरुस्त रहेगा और किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।