क्या PPF स्कीम में खोले जा सकते हैं 2 अकाउंट? जानिए क्या कहते हैं नियम
क्या है खबर?
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) को सुरक्षित और टैक्स-फ्री रिटर्न वाली शानदार स्कीम माना जाता है, जिसमें लोग बार-बार निवेश करना चाहते हैं। इसकी लोकप्रियता के कारण कई लोग यह भी सोचते हैं कि एक से ज्यादा PPF अकाउंट खोलकर ज्यादा बचत की जा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है। अगर, आपने बिना पूरी जानकारी के दूसरा खाता खोल दिया तो ब्याज का नुकसान झेलना पड़ सकता है। आइए जानते हैं PPF अकाउंट को लेकर नियम क्या कहते हैं।
नियम
क्या कहते हैं नियम?
पब्लिक प्रोविडेंट फंड एक्ट, 1968 के अनुसार, एक व्यक्ति अपने नाम से केवल एक ही PPF अकाउंट खोल सकता है। यह नियम सभी बैंकों और डाकघरों पर लागू होता है। आप निवेश सीमा दोगुना करने के लिए बैंक में एक और डाकघर में दूसरा खाता नहीं खोल सकते। ऐसा करना प्रतिबंधित है, भले ही अनजाने में खोले गए हों। दूसरे खाते का पता चलने पर इसे अनियमित मानकर बंद किया जा सकता है और उस पर ब्याज भी नहीं मिलेगा।
ट्रांसफर
2 खाते खुलने पर क्या करें?
PPF खाते आपके पैन कार्ड से जुड़े होते हैं और इनकी डुप्लीकेशन का पता लगाया जा सकता है। आप बैंक बदल सकते हैं, लेकिन इसमें नया खाता नहीं खोला जा सकता, बल्कि उसी खाते को स्थानांतरित किया जा सकता है। आपने गलती से 2 खाते खुलवा दिए हैं तो वित्त मंत्रालय की मंजूरी से दोनों को मर्ज कराया जा सकता है। इसके लिए आपको आवेदन देना होगा। अगर, खाते मर्ज नहीं किए गए तो दूसरे खाते में ब्याज नहीं मिलेगा।
विकल्प
ऐसे खुलवा सकते हैं 2 खाते
माता-पिता अपने नाबालिग बच्चे के नाम पर अलग PPF अकाउंट खोल सकते हैं, लेकिन एक शर्त है कि आपके अपने खाते और बच्चे के खाते में कुल मिलाकर एक वित्त वर्ष में 1.5 लाख रुपये से ज्यादा निवेश नहीं कर सकते। आपने अपने खाते में 1 लाख रुपये जमा किए हैं तो बच्चे के खाते में 50,000 रुपये से ज्यादा नहीं डाल सकते। इस स्कीम में सालाना 500 से 1.5 लाख रुपये तक जमा कर सकते हैं।
स्कीम
कैसे करें स्कीम में निवेश?
इस सरकार द्वारा समर्थित स्कीम में आप पोस्ट ऑफिस या सरकारी बैंकों में PPF अकाउंट खोल सकते हैं। कुछ निजी बैंक-HDFC बैंक और एक्सिस बैंक भी यह सुविधा देते हैं। इसमें निवेश की गई राशि 15 साल तक लॉक रहती है। इस पर वर्तमान में 7.1 फीसदी सालाना ब्याज मिल रहा है। ब्याज हर साल कंपाउंड होता है और हर महीने की 5 तारीख से महीने के आखिरी दिन के बीच के न्यूनतम बैलेंस पर गणना की जाती है।