2027 तक भारत में होगी करीब 10 लाख AI पेशेवरों की कमी
स्टाफिंग कंपनियों और विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, 2027 तक भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पेशेवरों की भारी कमी देखने को मिलेगी।
अनुमान है कि AI विशेषज्ञों की मांग 23 लाख तक पहुंच जाएगी, लेकिन 2027 तक महज 12 लाख के करीब ही काबिल लोग उपलब्ध हो पाएंगे।
सबसे ज्यादा कमी AI डिप्लॉयमेंट से जुड़ी भूमिकाओं में है। केवल जेनरेटिव AI में ही 83 प्रतिशत पेशेवरों की कमी बताई गई है।
भर्ती में देरी से AI के इस्तेमाल में पिछड़ रहीं कंपनियां
इस कमी के चलते करीब 80 प्रतिशत कंपनियों को कुशल उम्मीदवारों को खोजने में दिक्कत आ रही है। विशेषज्ञ भूमिकाओं को भरने में 90 दिनों से भी ज्यादा का वक्त लग रहा है।
इस देरी के कारण IT, बैंकिंग, मैन्युफैक्चरिंग और हेल्थकेयर जैसे प्रमुख उद्योग अपने AI प्रोजेक्ट्स को बड़े पैमाने पर लागू करने में पिछड़ रहे हैं।
भर्ती की सबसे ज्यादा मांग ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) से आ रही है। ये सेंटर्स अनुभवी पेशेवरों को आकर्षित करने के लिए 50 प्रतिशत या उससे ज्यादा बढ़े हुए वेतन भी दे रहे हैं।
हालांकि, डाटा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी चुनौतियों के कारण 10 प्रतिशत से भी कम कंपनियां पूरी तरह से AI को अपनाने के लिए तैयार हैं।