बजट 2026 से क्या कुछ चाहता है देश का टेलीकॉम सेक्टर?
क्या है खबर?
बजट सत्र शुरू हो गया है और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को देश का बजट पेश करेंगी। देश का टेलीकॉम सेक्टर इस बजट से कई बड़ी उम्मीदें लगाए बैठा है। टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि भारी टैक्स और सरकारी शुल्क के कारण उनके लिए 5G नेटवर्क का विस्तार करना और नई तकनीक में निवेश करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे समय में इस सेक्टर को सरकारी मदद की बहुत जरूरत है।
लाइसेंस फीस
लाइसेंस फीस घटाने की मांग
टेलीकॉम कंपनियों की संस्था सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने सरकार से लाइसेंस फीस घटाने की मांग की है। अभी कंपनियां अपने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी AGR का 3 प्रतिशत लाइसेंस फीस देती हैं। COAI का प्रस्ताव है कि इसे घटाकर 0.5 से 1 प्रतिशत किया जाए। कंपनियों का कहना है कि इससे प्रशासनिक खर्च पूरे हो जाएंगे और कैश फ्लो पर दबाव कम होगा, जिससे नेटवर्क सुधार में निवेश संभव होगा।
सुझाव
डिजिटल भारत फंड और GST पर सुझाव
रिलायंस जियो और भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया (Vi) प्रतिनिधित्व करने वाले COAI ने सरकार से डिजिटल भारत निधि में अतिरिक्त योगदान रोकने की भी अपील की है। संगठन का कहना है कि इस फंड में पहले से ही बड़ी राशि जमा है, जिसका पूरा इस्तेमाल नहीं हुआ है। इसके अलावा, टेलीकॉम कंपनियों ने GST सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि स्पेक्ट्रम भुगतान और अन्य लेवी पर जमा होता इनपुट टैक्स क्रेडिट बड़ी समस्या बन चुका है।
भविष्य
स्पेक्ट्रम नीति और भविष्य की चिंता
टेलीकॉम सेक्टर ने स्पेक्ट्रम की कीमत और आवंटन नीति में भी बदलाव की मांग की है। कंपनियों का कहना है कि आज टेलीकॉम नेटवर्क देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ बन चुका है। अगर टैक्स और लेवी का बोझ कम नहीं हुआ, तो कवरेज बढ़ाना और सर्विस क्वालिटी सुधारना मुश्किल होगा। भारत सरकार के सामने चुनौती है कि वह बजट में राजकोषीय संतुलन और डिजिटल विकास, दोनों को साथ लेकर चले।