हूती हमलों से कच्चे तेल के दाम 114 डॉलर के पार, भारतीय शेयर बाजार पर खतरा
मध्य पूर्व में जारी तनाव की वजह से तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड लगातार 114 डॉलर (करीब 10,000 रुपये) प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है।
सऊदी अरब पर हाल ही के हूती हमलों ने तेल की सप्लाई में रुकावट आने की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार (26 अक्टूबर) को कीमतें 117 डॉलर (करीब 11,000 रुपये) प्रति बैरल को पार कर गई थीं, जो इस साल की शुरुआत के मुकाबले अभी भी काफी ज्यादा हैं।
इस कारण बढ़े तेल के दाम
इन हमलों के बाद अमेरिका सऊदी अरब से गैर-जरूरी कर्मचारियों को वापस बुला रहा है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल ईरान के साथ मामले सुलझाने की कोई कोशिश नहीं कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई में और भी बड़ी दिक्कतें आ सकती हैं। भारत की बात करें तो, जो ज्यादातर तेल बाहर से मंगाता है, इन ऊंची कीमतों का असर हर स्तर पर पड़ेगा।
इसका सीधा बोझ उद्योगों पर भी पड़ेगा और शेयर बाजार के लिए भी माहौल मुश्किल हो जाएगा। इंवेस्ट आज फॉर कल के संस्थापक अनंत लाढ़ा का कहना है, "कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ा जोखिम हैं।" भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है और अगर, तेल के दाम ऊंचे रहते हैं तो सभी कंपनियों की इनपुट कॉस्ट काफी बढ़ जाती है। हम देखेंगे कि इसका सीधा असर कंपनियों के EPS ग्रोथ रेट और उनकी अर्निंग प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ेगा।