ब्रेंट पहुंचा 113 डॉलर के पार, क्या है कच्चे तेल की कीमत में तेजी की वजह?
क्या है खबर?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है। आज (23 अक्टूबर) भी तेल की कीमतों में बढ़त दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड 0.5 फीसदी चढ़कर 113.75 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 0.7 फीसदी की तेजी के साथ 100.13 डॉलर पर पहुंच गया। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका से कीमतों में उछाल आया है।
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तेल ठिकानों पर हमलों से बढ़ी सप्लाई की चिंता
मिडिल ईस्ट में तेल ठिकानों और जहाजों पर हमलों के कारण कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
सऊदी अरब के शायबा ऑयलफील्ड पर ड्रोन हमलों और हूथी विद्रोहियों की गतिविधियों ने बाजार की चिंता बढ़ाई है। ब्रेंट क्रूड पिछले सप्ताह 4.2 फीसदी और पिछले महीने 12.5 फीसदी महंगा हुआ।
साल की शुरुआत से अब तक इसकी कीमतों में 81.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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होर्मुज स्ट्रेट में तनाव से तेल कारोबार प्रभावित
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां से वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की करीब 20 फीसदी सप्लाई गुजरती है।
इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से दुनियाभर में ईंधन की कमी का खतरा बढ़ सकता है। ईरान के मुताबिक, हालिया घटनाओं में सात तेल टैंकर आग की चपेट में आए या क्षतिग्रस्त हुए।
इससे तेल की सप्लाई और समुद्री परिवहन की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
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परिवहन खर्च और ईंधन की कमी का असर
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की एक वजह परिवहन और सुरक्षा पर बढ़ता खर्च भी है।
युद्ध प्रभावित क्षेत्र में जहाजों के बीमा प्रीमियम बढ़ने और सुरक्षित आवाजाही के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने से तेल की ढुलाई महंगी हो रही है। वहीं, खाड़ी क्षेत्र से रिफाइंड ईंधन के निर्यात में रुकावट और यूक्रेन के रूसी रिफाइनरियों पर हमलों से सप्लाई पर दबाव बढ़ा है।
इन परिस्थितियों में बाजार में तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।