AI के कारण 2030 तक भारत में मध्यम स्तर के पेशेवरों की होगी कमी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे-जैसे वैश्विक स्तर और भारत में कार्यबल के स्वरूप को बदल रहा है, BOTS.Ai के निदेशक निखार अरोड़ा ने चेतावनी दी है कि शुरुआती स्तर के कार्यों को ऑटोमेट करने से काम के दौरान सीखने के अवसर सीमित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि 2030 तक भारतीय कंपनियों को AI इंजीनियर्स की तुलना में अनुभवी मध्यम स्तर के पेशेवर ढूंढना मुश्किल हो जाएगा। दरअसल, AI के आने से शुरुआती स्तर के कई काम (रिज्यूम छांटना और पॉलिसी से जुड़े सवालों के जवाब देना) AI करने लगा है, जिसकी वजह से कम लोगों को ऐसा व्यावहारिक अनुभव मिल पाता है, जो उनके करियर में आगे बढ़ने के लिए जरूरी होता है।
परिणाम-आधारित बिलिंग का सुझाव
जब AI इतने सारे शुरुआती काम संभाल रहा है तो भविष्य में कुशल पेशेवरों की कमी होने का असली खतरा है। अरोड़ा ने यह भी बताया कि भारतीय कंपनियां अपने AI निवेश से अच्छा रिटर्न नहीं देख पा रही हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि परिणाम-आधारित बिलिंग की ओर बढ़ना चाहिए, ताकि बिजनेस इस नई टेक्नोलॉजी से सच में फायदा उठा सकें।