स्वास्थ्य बीमा लेने से पहले इन बातों पर जरूर कर लें गौर, वरना बाद में पछताएंगे
क्या है खबर?
मौजूदा समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं अचानक सामने आ सकती हैं और उनके इलाज का खर्च परिवार की जमा-पूंजी पर भारी पड़ जाता है। निजी अस्पतालों में छोटी-सी सर्जरी से लेकर गंभीर बीमारियों का इलाज लाखों रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य बीमा होना बहुत जरूरी है। यह आर्थिक बोझ कम करने के साथ इलाज के समय मानसिक शांति भी देता है। आइये जानते हैं पहली बार स्वास्थ्य बीमा लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
सह-भुगतान
सह-भुगतान पॉलिसी चुनने से पहले करें विचार
स्वास्थ्य बीमा का मतलब यह नहीं होता कि अस्पताल का बिल बिल्कुल नहीं आएगा। कई पॉलिसियों में सह-भुगतान का प्रावधान होता है, जिसमें आपको खर्च का एक हिस्सा खुद देना पड़ता है। आपका सह-भुगतान 10 प्रतिशत है और अस्पताल का बिल 1 लाख रुपये है तो आपको 10,000 रुपये देने होंगे। ऐसी पॉलिसियों में प्रीमियम कम होता है, जो आकर्षक लगता है, लेकिन क्लेम करते समय अपनी जेब पर भारी पड़ता है। इसलिए पॉलिसी लेने से पहले विचार जरूर करें।
किराया सीमा
कमरे की किराया सीमा भी दें ध्यान
पहली बार बीमा लेने वालों को कमरे के किराए की सीमा पर भी विचार करना चाहिए। कुछ पॉलिसियां अस्पताल के कमरे के लिए प्रति दिन भुगतान की जाने वाली राशि को सीमित कर देती हैं। आप उस सीमा से अधिक किराए वाला कमरा चुनते हैं तो बीमा कंपनी पूरे बिल पर कटौती कर सकती है। इससे भुगतान राशि में काफी वृद्धि हो सकती है। कमरे के किराए की सीमा के बिना या सही सीमा वाली पॉलिसी चुनना सही रहेगा।
जांच
इन बातों की भी करें जांच
अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्चों को कवर करने वाली पॉलिसी लेना सही रहता है। कई बार इलाज के लिए 24 घंटे भर्ती रहने की जरूरत नहीं होती। इसके लिए डेकेयर उपचार को बीमा में कवर किया जाना चाहिए। कुछ बीमा स्कीम्स में घर पर उपचार की सुविधा भी शामिल होती है। इसके अलावा यह भी देखें कि बीमा कंपनी का नेटवर्क कितना बड़ा है और आपके शहर में उसके कितने अस्पताल जुड़े हैं।