भारत में ऐपल की बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची
क्या है खबर?
ऐपल ने भारत में रिकॉर्ड तिमाही बिक्री दर्ज की है। कंपनी के CEO टिम कुक ने कहा कि दिसंबर तिमाही में भारत से ऐपल का राजस्व अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। आईफोन, मैक और आईपैड की रिकॉर्ड बिक्री और सर्विसेज से मजबूत कमाई इसकी बड़ी वजह रही है। ऐपल भारत को अब एक बड़े ग्रोथ इंजन के तौर पर देख रही है, जहां भविष्य में कंपनी के लिए नए मौके मौजूद हैं।
मांग
आईफोन, मैक और सर्विसेज की मजबूत मांग
कुक के मुताबिक, भारत में आईफोन, मैक और आईपैड तीनों ने दिसंबर तिमाही में रिकॉर्ड राजस्व बनाया है। इसके साथ ही, सर्विसेज से होने वाली कमाई भी ऑल-टाइम हाई पर पहुंची। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन मार्केट है, लेकिन ऐपल का यहां अभी भी छोटा शेयर है। इसी वजह से कंपनी को भारत में लंबी अवधि की मजबूत ग्रोथ की पूरी उम्मीद है और निवेश को लेकर भरोसा बढ़ा है।
मार्केट शेयर
नए ग्राहक और बढ़ता मार्केट शेयर
ऐपल के CFO केविन पारेख ने बताया कि भारत में कंपनी के इंस्टॉल्ड बेस में डबल डिजिट ग्रोथ देखी जा रही है। खास बात यह है कि आईफोन, मैक, आईपैड और ऐपल वॉच खरीदने वाले ज्यादातर ग्राहक पहली बार ऐपल प्रोडक्ट ले रहे हैं। इससे साफ है कि नए यूजर्स तेजी से ऐपल के इकोसिस्टम से जुड़ रहे हैं, जिससे आने वाले समय में कंपनी की बिक्री और ब्रांड पकड़ और मजबूत हो सकती है।
रणनीति
रिटेल विस्तार और भविष्य की रणनीति
भारत में ऐपल अपने रिटेल नेटवर्क को भी तेजी से बढ़ा रही है। कंपनी ने हाल ही में भारत में अपना पांचवां स्टोर खोला है और मुंबई में एक और स्टोर खोलने की तैयारी है। इसके साथ ही लोकल मैन्युफैक्चरिंग और प्रीमियम स्मार्टफोन की बढ़ती मांग ऐपल को फायदा दे रही है। ऐपल भारत को सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग हब नहीं, बल्कि भविष्य की बड़ी डिमांड वाला मार्केट मान रहा है और लंबी रणनीति पर काम कर रहा है।
राजस्व
आंकड़ों में ऐपल की भारत में बढ़त
आंकड़ों की बात करें तो दिसंबर तिमाही में आईफोन राजस्व साल-दर-साल करीब 23 प्रतिशत बढ़कर लगभग 85 अरब डॉलर (लगभग 7,800 अरब रुपये) से ज्यादा रहा। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत में ऐपल का स्मार्टफोन मार्केट शेयर वॉल्यूम के हिसाब से करीब 9 प्रतिशत और वैल्यू के हिसाब से लगभग 28 प्रतिशत तक पहुंच गया। मैक राजस्व में 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और या 8.4 अरब डॉलर (लगभग 770 अरब रुपये) रहा।