क्यों भारत में कच्चे तेल की मांग में आ सकती है 40 फीसदी की गिरावट?
इस साल भारत में कच्चे तेल की खपत में बढ़ोतरी महामारी के बाद से सबसे कम रहने का अनुमान है। यह बढ़ोतरी केवल 78,000 बैरल प्रति दिन तक सीमित रह सकती है, जो पहले के अनुमानों से 40 फीसदी कम है।
इसका मुख्य कारण मध्य पूर्व संघर्ष की वजह से ऊर्जा की कीमतों में आया उछाल है। इससे ईंधन महंगा हो रहा है, जिससे न केवल अर्थव्यवस्था पर, बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर भी काफी दबाव पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने की थी ईंधन बचाने की अपील
तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबको घर से काम करने, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने और गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की सलाह दे रहे हैं, ताकि ईंधन की बचत हो सके।
इससे डीजल और पेट्रोल दोनों की मांग में तेज गिरावट आई है और माल ढुलाई गतिविधियों में भी 20 फीसदी तक कमी दर्ज की गई है। इस बीच, सरकारी तेल रिफाइनरियों को हर दिन करीब 6 अरब रुपये का नुकसान हो रहा है क्योंकि वे बाजार भाव से कम पर ईंधन बेच रहे हैं। हालांकि, उनकी बिक्री निजी कंपनियों के मुकाबले बढ़ी है।