AI ने कंसल्टिंग कंपनियों को कीमत तय करने का तरीका बदलने को किया मजबूर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने मैकिन्से जैसी बड़ी कंसल्टिंग फर्म्स को अपनी प्राइसिंग पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है। अब क्लाइंट्स घंटों के हिसाब से या टीम साइज के आधार पर पैसे देने के बजाय असली नतीजों के हिसाब से पैसे चुकाना चाहते हैं।
इसका मतलब है कि अगर, कोई प्रोजेक्ट कंपनी की लागत कम करता है या उसके मुनाफे को बढ़ाता है तो उसी के आधार पर भुगतान होनी चाहिए।
पहले ये फर्में लंबे प्रोजेक्ट्स और कई कर्मचारियों पर निर्भर रहती थीं, अब यह तरीका बदल रहा है।
मैकिन्से ने पार्टनर्स के कंपनसेशन में बदलाव किए, कैश बचाकर रखा
नतीजों पर आधारित यह दृष्टिकोण अब कानून और लेखा-जोखा के क्षेत्र में भी फैल रहा है, जहां फिन और आईडेनाफी जैसी कंपनियां हर टास्क पूरा होने पर ही पैसे ले रही हैं।
हालांकि, यह रास्ता इतना आसान भी नहीं है। कंसल्टिंग फर्मों के लिए अपनी कमाई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है, खासकर जब अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव आए या क्लाइंट्स किसी वजह से पीछे हट जाएं।
इससे निपटने के लिए मैकिन्से अंदरूनी तौर पर कुछ बदलाव कर रहा है। जैसे, पार्टनर्स के कंपनसेशन में बदलाव करना और बफर के तौर पर ज्यादा कैश बचाकर रखना।