AI की रफ्तार ने बढ़ाई मेमोरी चिप्स की किल्लत, 2028 तक राहत की उम्मीद नहीं
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती रफ्तार ने दुनियाभर में मेमोरी चिप्स की भारी कमी पैदा कर दी है। लोग इसे 'रैमगैडन' कहने लगे हैं।
दरअसल, चिप बनाने वाली कंपनियां अब आम रैम और डीरैम के बजाय AI के लिए खास तौर पर बनी हाई-बैंडविड्थ मेमोरी पर ज्यादा जोर दे रही हैं।
नतीजा यह है कि आम मेमोरी चिप्स की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और इनकी सप्लाई चेन भी गड़बड़ा गई है। सैमसंग का कहना है कि 2027 तक यह कमी और गंभीर हो जाएगी और 2028 तक इससे राहत मिलने के कोई आसार नहीं हैं।
लैपटॉप और स्मार्टफोन की रैम की कीमतों में उछाल
लैपटॉप और स्मार्टफोन की मेमोरी चिप्स के दाम पिछले एक साल में 5 से 6 गुना तक बढ़ गए हैं। जहां हांगकांग में 16GB रैम पहले 300 से 400 हांगकांग डॉलर (करीब 3,600-4,800 रुपये) में मिलती थी, अब वह 1,500 हांगकांग डॉलर (करीब 18,000 रुपये) में मिल रही है।
कीमतों में इस अचानक उछाल ने कई लोगों को नए कंप्यूटर या लैपटॉप खरीदने से रोक दिया है और कुछ लोग कम रैम वाले मॉडल खरीदने को मजबूर हैं।
यही नहीं, कार बनाने वाली कंपनियां भी इस महंगाई की मार से अछूती नहीं हैं। चिप्स के बढ़ते दामों से गाड़ियों की कीमत भी बढ़ सकती है।