AI में भारी निवेश के बाद आर्थिक संकट में मेटा, ओरेकल समेत दिग्गज कंपनियां
कोरवीव, मेटा और ओरेकल जैसी बड़ी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में भारी निवेश करने के बाद अब आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रही हैं।
दरअसल, AI के लिए डाटा सेंटर बनाने और उन्हें चलाने का खर्च इतना ज्यादा हो गया है कि कंपनियों को अभी इस तकनीक से इतनी कमाई होने की उम्मीद नहीं है। इस वजह से निवेशक भी घबराए हुए हैं।
कोरवीव के बॉन्ड की कीमत में भारी गिरावट आई है। पिछले सप्ताह एनवीडिया को भी 270 अरब डॉलर (करीब 25,500 अरब रुपये) का नुकसान उठाना पड़ा क्योंकि OpenAI ने अपना आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) टाल दिया और एंथ्रोपिक की बिक्री भी धीमी पड़ गई है।
4,000 अरब डॉलर कमाई कम होने का अनुमान
गार्टनर की रिपोर्ट बताती है कि 2030 तक डाटा सेंटर्स को अपने पूंजी और फाइनेंसिंग के खर्चों को पूरा करने और अच्छा मुनाफा कमाने के लिए 8,500 अरब डॉलर (करीब 8 लाख अरब रुपये) की कमाई करनी होगी।
हालांकि, अनुमान है कि वे केवल 3,600 अरब डॉलर (करीब 3.4 लाख अरब रुपये) ही कमा पाएंगे। यह एक बहुत बड़ा अंतर है, जिससे 4,000 अरब डॉलर (करीब 3.8 लाख अरब रुपये) से ज्यादा की रकम खतरे में पड़ सकती है।
ओरेकल का बड़ा प्रोजेक्ट जुपिटर भी मुश्किल में है क्योंकि बिजली मंजूरी मिलने में देरी हो रही है, जिससे उसके लोन पर दबाव बढ़ रहा है, वहीं मेटा और एनवीडिया के प्रोजेक्ट्स से जुड़े बॉन्ड की कीमत भी घट गई है।
इन सबके ऊपर बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) ने चेतावनी दी है कि यह लगातार बढ़ता कर्ज एक खतरनाक चक्र में बदल सकता है। कंपनियां कर्ज चुकाने के लिए और कर्ज लेंगी, जिससे पूरे AI उद्योग के लिए आर्थिक संकट का खतरा पैदा हो सकता है।