धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने के 5 विकल्प, जानें कहां और कैसे करें निवेश
क्या है खबर?
आज धनतेरस के साथ 5 दिन के दिवाली त्योहार की शुरुआत हो गई है। इस खास मौके पर सोना और चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। बड़ी संख्या में लोग गहने, सिक्के और पूजा में इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजें खरीदते हैं। हालांकि, अब खरीदारी के पारंपरिक तरीकों के अलावा निवेश के कई नए विकल्प भी मौजूद हैं। ऐसे में खरीदार अपनी जरूरत, पसंद और बजट के हिसाब से इनमें से कोई विकल्प चुन सकते हैं।
सिक्के
सोने-चांदी के सिक्के खरीद सकते हैं
धनतेरस पर सोने और चांदी के सिक्के खरीदने का चलन बहुत ही लंबे समय से चला आ रहा है।
बाजार में एक ग्राम सोने का सिक्का करीब 14,000 से 30,000 रुपये में मिल सकता है। वहीं, 10 ग्राम चांदी के सिक्के की कीमत लगभग 3,000 से 10,000 रुपये तक हो सकती है।
ये सिक्के ज्वेलरी की दुकानों के अलावा ब्लिंकिट, स्विगी इंस्टामार्ट और जेप्टो जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी आसानी से उपलब्ध हैं।
विकल्प
लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां भी हैं विकल्प
धनतेरस पर कई परिवार दिवाली पूजा के लिए सोने और चांदी की लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां खरीदते हैं।
चांदी की मूर्तियों की कीमत आमतौर पर 20,000 रुपये से शुरू होकर डेढ़ लाख रुपये से अधिक तक हो सकती है। इनका दाम धातु की शुद्धता, वजन, कारीगरी और ब्रांड पर निर्भर करता है।
सोने की शुद्ध या सोने की परत चढ़ी मूर्तियां भी खरीदी जा सकती हैं। खरीदारी से पहले वजन और बनाने की लागत जरूर जांचें।
निवेश
डिजिटल गोल्ड और ETF में निवेश
कम रकम से सोना खरीदने और निवेश शुरू करने वालों के लिए डिजिटल गोल्ड एक विकल्प है।
कुछ प्लेटफॉर्म पर 10 या 100 रुपये से भी इसकी खरीदारी की जा सकती है। सेफगोल्ड, तनिष्क, MMTC-पैम्प और फोनपे जैसे प्लेटफॉर्म यह सुविधा देते हैं। डिजिटल चांदी भी कुछ कंपनियां उपलब्ध कराती हैं।
इसके अलावा, गोल्ड और सिल्वर ETF के जरिए शेयर बाजार में निवेश किया जा सकता है। इसके लिए डीमैट और ट्रेडिंग खाते की जरूरत होती है।
गोल्ड वॉल्ट
गोल्ड वॉल्ट और फंड ऑफ फंड्स
गोल्ड वॉल्ट भी सोने में निवेश करने का एक दूसरा तरीका है।
इसमें खरीदार बाजार के मौजूदा भाव पर सोना खरीदते हैं, जिसे सुरक्षित तिजोरी में रखा जाता है। जरूरत पड़ने पर इसकी घर तक डिलीवरी भी ली जा सकती है। धन जैसे मंच यह सुविधा देते हैं।
हालांकि, खरीदारी से पहले सोना रखने का शुल्क, डिलीवरी खर्च और सामान पहुंचने में लगने वाले समय की जानकारी लेना जरूरी है। इस